ट्रेन की तीन रातें और अकेली भाभी – Train Bhabhi Hindi Adult Story
इस train bhabhi Hindi adult story की शुरुआत पटना स्टेशन से होती है। पटना जंक्शन पर भीड़ इतनी थी कि साँस लेना भी मुश्किल लग रहा था। अरविंद ने अपना बैग…
इस train bhabhi Hindi adult story की शुरुआत पटना स्टेशन से होती है। पटना जंक्शन पर भीड़ इतनी थी कि साँस लेना भी मुश्किल लग रहा था। अरविंद ने अपना बैग…
इस purana pyar Hindi sex story की शुरुआत सालों बाद एक गाँव की चौखट पर होती है, जहाँ मीना अपनी बीमार सास को देखने लौटी थी।
छोटे शहर की संकरी गली, हर सुबह एक आवाज़ और एक राज़ जो अब छिप नहीं पाया। पूरी shaadishuda bhabhi Hindi sex story पढ़ें।
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में, जहाँ कच्चे मकान, हरियाली खेत और पुराने तालाब थे, वहाँ रहती थी रमीला। उम्र पच्चीस साल। गोरी-चिट्टी, लंबी, भरपूर शरीर। बड़ी-बड़ी गोल चुचियाँ, जिनके लंबे काले निप्पल हमेशा साड़ी के पार से झलकते। पतली कमर और भारी, मुलायम गाँड जो चलते समय हिलती-डुलती रहती। पति रामू शहर में मजदूरी करने गया हुआ था। महीनों से घर नहीं लौटा। ससुराल वाले खेतों में काम करते, और रमीला अकेली अपनी झोपड़ी में दिन काटती।
मेरे सामने सिर्फ उनके बड़े-बड़े बूब्स और वह गोरी गांड आ रही थी।उनका फिगर भाई क्या बताऊं मैं … एकदम पक्का 34-28-36 का था।अब मैं उन्हें चोदने के बारे में सोचने लगा … और वह दिन भी जल्द ही आ गया।उनके घर में सबसे छोटे भाई की शादी की बात चल रही थी, तो सब लड़की देखने उनके गांव गए थे। लेकिन सोनम भाभी नहीं गई थीं।
भाभी का फिगर बहुत ही कातिलाना है। उनके बूब्स का साइज 34B और उसका पिछवाड़ा 36 का है। उनकी कमर बिल्कुल पतली सी है। ज्यादा से ज्यादा 28 ही होगा भाभी की कमर का माप।मेरी भाभी की गांड इतनी सेक्सी है कि जब वो चलती है तो उसको हर कोई देखने लग जाता है।
अचानक आंटी ने मुझे चारों हाथ-पैर करवाया। मेरी गांड उनके सामने थी।उन्होंने मेरे गांड के छेद पर जीभ लगा दी। “आंटी… ये क्या…?” “चुप रह… आज तेरी गांड भी चूसूंगी।”
राजू ने एक जोर का धक्का मारा और आधा लंड गांड में घुस गया। सुनीता की आंखों से आंसू निकल आए लेकिन वो पीछे हट नहीं रही थी। रमेश ने उसके बाल और कसकर पकड़े और गले तक लंड ठूस दिया।
मैंने फटाक से भाभी को नंगी कर दिया। उसके गाउन को निकाल फेंका और उस पर टूट पड़ा। मैंने भाभी की टांगों को फैलाया और उसकी बूर को चाटने लगा। वो सिसकारियां लेने लगी। काफी देर तक भाभी की बूर को चाटने के बाद मैंने अपने कपड़े भी निकाल दिये।
दोनों हाथों से उसकी छोटी काली गांड के गाल फैलाए और जीभ उसके गांड के छेद पर घुमाई। छेद सिकुड़ा हुआ और काला था। मैंने जोर से चाटना शुरू कर दिया। गंध और स्वाद दोनों ही मेरे मुँह में फैल गए।सुमित्रा मचलने लगी। “आह्ह… गंदा… वहाँ मत चाटो… गंदी है…”
भैरव ने ब्रा की लेस खींची और भूरे रंग के कड़े निप्पल पर उंगली फेरने लगा। फिर उसने मुँह लगा लिया। निप्पल चूसने लगा, दांतों से हल्का काटा। माँ काँप उठी।”भैरव… प्लीज…”
मैंने नेहा की बूर में उंगली डाली और उसे अपना लंड पकड़ा दिया। उसने मेरा लंड सहलाना शुरू किया और मैं उसकी बूर रगड़ने लगा। हम दोनों सोफे पर लेट गए और मजा लेने लगे। मैंने उससे पूछा कि क्या उसे मेरा लंड पसंद आया।