सुमन की गदरायी बदन की बुर की आग | Village Sex Story

जब मैंने आँखें खोलीं, तो मुझे बाहर से आवाज़ सुनाई दी। गाने के कुछ बोल समझ में आए – “मेरा जवानी का मजा लो…मेरे अंग जल जाए…”। बाहर से खुशी की आवाज़ें आ रही थीं।

मैंने कमरे की तरफ देखा और याद करने की कोशिश की कि मैं यहाँ कैसे आया। मैं बहुत कमजोर महसूस कर रहा था और मेरा सिर घूम रहा था। मैं बिस्तर से उठा और बाहर देखने की कोशिश की।

खिड़की से मुझे कुछ आदमी संगीत की धुन पर नाचते हुए दिखाई दिए। उनमें से कई देसी रम की बोतल लिए जमीन पर बैठे थे। वे सब आपस में हंस रहे थे और चिल्ला रहे थे।

कुछ लोग बोतल को सिर के ऊपर उठाकर नाच रहे थे। उनमें से हर कोई नशे में धुत और जश्न मनाता हुआ लग रहा था। मैं याद करने की कोशिश करता हूँ कि मैं इस गाँव में कैसे आया।

मुझे बस इतना याद है कि मैं अपने माता-पिता के साथ पहले दिन इस बिहार के गाँव में आया था। मेरे पिता राजेश एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हैं। उनका तबादला इस गाँव में हो गया।

हम गाँव से थोड़ी दूर एक बंगले में रुके। गाँव में पहुँचते ही मेरी माँ सुमन ने वहाँ की गर्मी की शिकायत करना शुरू कर दिया। हमारे घर में एक महिला काम करती थी।

उनका नाम रजिया था। मेरी माँ उनसे बहुत बातें करती थीं। (मैं अंकित, 20 साल का हूँ।

)मुझे याद करने की कोशिश करने पर वह रात याद आती है जब मैंने अपने माता-पिता की बातचीत सुनी थी। खाना खाने के बाद, मेरे पिताजी अखबार पढ़ रहे थे और मेरी माँ शीशे के पास बैठकर अपने बाल संवार रही थीं। माँ- "भैरव सिंह कौन है?

"पिताजी- "तुम्हें उसका नाम कैसे पता चला? "माँ- "रजिया ने मुझे उसके बारे में बताया था। "पिताजी- "उसने क्या कहा?

"माँ- “उसने कहा कि वह इस गाँव का सबसे बड़ा आदमी है। ”पिताजी- "मैंने गाँव की दूसरी औरतों से बिल्कुल उल्टी बातें सुनी हैं। वह एक शैतान है।

गाँव वाले उसकी पूजा करते हैं। "अगले दिन माँ ने यह बात रजिया को बताई। रजिया गुस्से में बोली, “भाभी… गाँव की दूसरी औरतें हमसे जलती हैं क्योंकि हमारा गाँव बेहतर है।

”अचानक दरवाजा खुला। मैं बिस्तर पर जाकर आँखें बंद कर लीं। रजिया दो नशे में धुत आदमियों के साथ अंदर आई।

रजिया- "यह कमरा खाली है। "एक ने मेरी तरफ इशारा किया- "इसके बारे में क्या? "रजिया हँसी- "आज यह आँखें नहीं खोलेगा…"उन्होंने मुझे उठाकर छोटे अंधेरे भंडारघर में डाल दिया।

दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ। मैं धीरे से उठा और बाहर निकला। मैंने देखा रजिया अपनी गांड हवा में उठाए खड़ी थी।

एक आदमी से कह रही थी, "मुझे भैरव सिंह की तरह चोदो… काश मैं उसकी रंडी होती। "आदमी बोला, "अब भैरव सिंह तुम्ह जैसी कुतियों को नहीं चोदेगा… उसे आज नई दुल्हन मिली है… आज उसकी चूत का सारा पानी निचोड़ लेगा। "मुझे भैरव सिंह याद आ गया।

चौड़े सीने वाला मजबूत आदमी। जब वह हमारे घर आया था तो उसकी निगाहें बार-बार माँ पर टिकती थीं। रात को माँ-बाप की बातचीत सुनी थी।

माँ को भैरव पसंद नहीं था। पिताजी ने कहा था कुछ दिन सब्र करने को। अगले दिन पिताजी ने रजिया को घर से निकाल दिया।

मैंने फिर से कमरे के अंदर झाँका। एक आदमी ने रजिया की साड़ी कमर तक उठा दी। उसकी नंगी सांवली गांड दिख रही थी।

उसने लुंगी खोली और अपना आधा खड़ा लंड उसकी गांड पर रगड़ने लगा। रजिया बोल रही थी, "उस कुतिया को आज सख्ती से चोदना चाहिए। आज भैरव सिंह उसकी चूत की पवित्रता तोड़ देगा।

"दूसरे आदमी ने अपना लंड निकालकर रजिया के मुँह पर रगड़ना शुरू कर दिया। मैं वहाँ से भाग गया। ऊपर मंजिल पर बंद कमरों से कराहें और रोने की आवाजें आ रही थीं।

लगा जैसे नरक में हूँ। मैं छत पर चला गया। मुझे सब याद आ गया।

उस रात बंगले के बाहर भीड़ इकट्ठी हो गई थी। हथियार लेकर चिल्ला रहे थे। फिर गोली चली।

भैरव सिंह की गाड़ी आई। पुलिस वाले ने पिताजी को नर्स को चोट पहुँचाने के झूठे आरोप में ले गए। अगली सुबह पिताजी लौटे।

उन्होंने माँ से कहा कि गाँव में कोई कानून नहीं। पंचायत तय करेगी। अगर बाहरी आदमी गाँव की लड़की को छूता है तो उसकी बीवी को सजा दी जाती है।

भैरव सिंह मदद करने का नाटक कर रहा था। उसने कहा कि माँ से दिखावटी शादी करेगा ताकि गाँव वाले शांत रहें, फिर हम भाग सकें। पंचायत में भैरव ने प्रस्ताव रखा कि वह माँ को एक साल तक अपनी रखेगा।

माँ को मजबूरन हाँ कहना पड़ा। सबके सामने भैरव ने माँ के होंठ जबरदस्ती चूस लिए, जीभ अंदर डाल दी। रात को भैरव आया और योजना बताई।

अब मैं छत के कमरे की खिड़की से देख रहा था। मेरी माँ दुल्हन के कपड़ों में फूलों से सजे बिस्तर पर बैठी थी। आँखों में आँसू थे।

भैरव उसके बगल में था। भैरव- “नीचे कराहें सुनाई दे रही हैं ना? आज गाँव वाले इसलिए चुदाई कर रहे हैं क्योंकि रिवाज है… बाहरी ने हमारी लड़की छुई तो उसकी बीवी को सजा मिलेगी।

तुम्हें खुशनसीब समझो… तुम मेरे साथ हो। ”माँ- “भैरव… प्लीज मत करो… मेरे पति ने तुम पर भरोसा किया था…”भैरव- "अब मैं तेरा मर्द हूँ… यह बदन अब मेरा है। "उसने माँ का गाल जबरदस्ती पकड़ा।

भैरव- "तेरा बेटा ठीक है… उसे नींद की दवा दी थी… अब उस नए बच्चे के बारे में सोच जिसे मैं आज तेरी कोख में डालने वाला हूँ। "भैरव ने माँ के होंठों पर अपना मुँह रख दिया। गहरी चुदाई वाली चुंबन दी।

जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। माँ की लार मिल गई। उसका हाथ ब्लाउज पर गया।

हुक खोले। ब्लाउज नीचे खींचा। माँ की भरी हुई चूचियाँ बाहर आ गईं।

भैरव ने ब्रा की लेस खींची और भूरे रंग के कड़े निप्पल पर उंगली फेरने लगा। भैरव- "एक साल बाद तू मेरे बच्चे को इन चूचियों से दूध पिलाएगी। "फिर उसने मुँह लगा लिया।

निप्पल चूसने लगा, दांतों से हल्का काटा। माँ काँप उठी। "भैरव… प्लीज…"उसने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया।

अपना कुर्ता फेंका। चौड़ी छाती, घने बाल। फिर माँ की साड़ी और पेटीकोट खींचकर फेंक दिए।

माँ अब पूरी नंगी थी। पैरों के बीच घने बालों वाली चूत साफ दिख रही थी। भैरव- "हे भगवन!!!

जान… तू मेरी कल्पना से भी ज्यादा हरामी माल है… मैं तेरी चूत का स्वाद लेने को बेताब हूँ…"उसने जांघें फैलाईं और मुँह चूत पर लगा दिया। जीभ से चूत के होठ चाटने लगा, चूसने लगा। माँ तड़पने लगी।

"वहाँ नहीं… प्लीज…"भैरव ने जीभ अंदर डाल दी। माँ की कमर उछलने लगी। उसने सिर धकेलने की कोशिश की लेकिन भैरव ने जांघें कसकर पकड़ रखी थीं।

माँ रोने लगी, अजीब आवाजें निकालने लगी। भैरव ने मुँह हटाया और दो उंगलियाँ चूत में ठूंस दीं। "तेरी चूत तो पहले से गीली हो गई है रंडी… अब मैं अंदर जाऊँगा…"माँ चिल्लाई- "हे भगवन… नहीं…" और कूल्हे खुद ऊपर उठाने लगी।

सफेद पानी की धार छोड़ी। भैरव ने वह पानी चाट लिया। फिर बनियान खोली।

उसका मोटा, लंबा, नसों वाला लंड बाहर निकला। लगभग मुट्ठी जितना मोटा और खड़ा। माँ ने आँखें खोलीं और चीख पड़ी- "हे भगवन… इतना बड़ा…"भैरव ने पैर पकड़कर खींचा।

माँ हाथ-पैर मारने लगी। "भैरव… नहीं… यह मेरी चूत फाड़ देगा… प्लीज छोड़ दो…"भैरव ने लंड चूत के होठों पर रगड़ना शुरू किया। "डार्लिंग… तू सह लेगी…"फिर जोर का धक्का मारा।

लंड का टोपा अंदर घुस गया। माँ दर्द से चीखी- "आह्ह्ह… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है…"दूसरा जोरदार धक्का। आधा लंड चूत में समा गया।

माँ रो रही थी। भैरव- "पहली रात हर दुल्हन को दर्द होता है… तूने मुझे ऐसा महसूस कराया जैसे मैं कुंवारी चुदाई कर रहा हूँ। "उसने कमर पकड़ी और पूरे लंड को धीरे-धीरे अंदर धकेलने लगा।

आखिरकार पूरा लंड अंदर तक चला गया। अंडकोष माँ की गांड से टकरा रहे थे। भैरव ने माँ के होंठ चूसते हुए जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।

चूत पच-पच की आवाज करने लगी। माँ की चूचियाँ उसके हाथों में दब रही थीं। माँ पहले सिर्फ रो रही थी, फिर धीरे-धीरे दर्द के साथ मजा भी मिलने लगा।

उसके पैर भैरव की कमर पर लिपट गए। "आआआ… उह्ह्ह… माँ… आह्ह्ह…"भैरव लगातार चोद रहा था। कभी गहराई तक धकेलता, कभी पूरा निकालकर फिर जोर से पेलता।

फिर माँ ने जोर से कराहते हुए कहा- "हे भगवन… मैं झड़ने वाली हूँ…"भैरव रुका नहीं। और तेज धक्के मारने लगा। माँ का शरीर काँप उठा।

चूत से पानी की धार छोड़ी। भैरव फिर से जोर से चोदने लगा। कमरा चूत की शटशट आवाजों से गूंज रहा था।

माँ- “ओह भैरव… कितनी देर और… मैं थक गई…”भैरव हँसा- “अभी तो शुरू किया है रंडी…”फिर उसने कहा- "मैं झड़ने वाला हूँ… अपना पानी ले… मेरी दुल्हन…"माँ बोली- "तेरा लंड मेरी कोख छू रहा है… अगर झड़ गया तो गर्भवती हो जाऊँगी… निकालो प्लीज…"भैरव- "नहीं… मैंने सपना देखा है मेरे बच्चे तेरी चूचियाँ चूस रहे हैं। "उसने कमर कसकर पकड़ी और जोर-जोर से हिलाते हुए अपना पूरा माल माँ की चूत के अंदर उड़ेल दिया। गरम वीर्य की धारें अंदर जा रही थीं।

माँ भी साथ में काँप उठी। भैरव कुछ देर अंदर ही पड़ा रहा, फिर लंड बाहर खींचा। चूत से सफेद गाढ़ा वीर्य बाहर निकलने लगा।

थोड़ा खून भी मिला हुआ था। भैरव- "सुमन… बता… क्या तुझे मेरी चुदाई पसंद आई? क्या मैं तेरे डॉक्टर से बेहतर हूँ?

"माँ ने जवाब नहीं दिया तो उसने गाल पर थप्पड़ मारा। माँ- “बहुत दर्द हो रहा है अंदर…"भैरव रजिया को पुकारने नीचे गया। मैंने छिपकर सब देखा था।

अगले दिन सुबह रजिया ने कहा- "नीचे आ… तेरी माँ नए पापा के साथ सो रही है। "मैंने पूछा- "नए पापा? "रजिया हँसी- "भैरव सिंह अब तेरे नए बाप हैं।

"बाहर पिताजी इंस्पेक्टर के साथ आए। भैरव ने साफ कह दिया कि माँ अब उसकी कानूनी बीवी है। पिताजी ने भैरव को घूँसा मारा तो उसके आदमियों ने पिताजी को पीटा।

माँ सीढ़ियों पर मुश्किल से खड़ी थी। भैरव ने उसे कंधे पर उठाया और ऊपर ले गया। उठते समय माँ की एक चूची बाहर निकल आई थी।

मुझे कमरे में बंद कर दिया गया। शाम को रजिया मुझे माँ के पास ले गई। माँ थकी हुई थी, छाती पर भैरव के काटने के निशान थे।

रात को भैरव आया। माँ- "प्लीज आज इसे मेरे साथ सोने दो…"भैरव- "नहीं… आज दूसरी रात है… तुझे और सिखाना है। "उसने माँ को खींचकर जोर से चूमा।

फिर मुझे कमरे से बाहर कर दिया गया। दरवाजे के बाहर रघु खड़ा सुन रहा था। अंदर से आवाजें आ रही थीं।

भैरव- “सुमन… क्या महसूस हो रहा है मेरा लंड तेरी चूत में गहराई तक? ”माँ- “दर्द हो रहा है… बहुत दर्द… थोड़ा हल्का करो…”भैरव- "मैंने इतनी टाइट चूत कभी नहीं चुदी… यह ट्रेनिंग है… जल्द ही तू मेरी चुदाई की दीवानी हो जाएगी…"हर धक्के के साथ माँ की कराहें तेज हो रही थीं। रघु बोला- "तेरी माँ अंदर जमकर चुद रही है…"मैं वहाँ से चला गया।

दिन बीतते गए। हर रात वही सिलसिला। एक दिन रजिया आई और माँ से बोली कि वह मदद करेगी।

बोली कि भैरव ने ही नर्स को पैसे देकर झूठा आरोप लगवाया था क्योंकि वह माँ को देखकर पागल हो गया था। माँ ने मुझे बुलाया और कहा- "रजिया तुझे तेरे पिता के पास ले जाएगी… देख आना कि सच है या झूठ। "लेकिन रजिया ने मुझे पंचायत मुखिया के बेटे के पास ले जाकर धमकाया और कहा कि माँ से यही कहना कि पिताजी को देख लिया है।

मैं डरा हुआ था। वापस आकर माँ से वही कहा। उसी रात दूसरी नौकरानी सूजी ने माँ को चेताया- "रजिया पर भरोसा मत करो… वह दलाल है।

"माँ ने मुझसे कहा- "आज तू मेरे साथ सो। "भैरव आया तो माँ ने विनती की। भैरव ने माँ को उठाकर जोरदार चुंबन दिया, फिर कहा- "कल दो रातों का हिसाब चुकाना होगा।

"माँ मेरे ऊपर लेटी और फुसफुसाई- "भैरव अंकल अच्छे आदमी नहीं… वह तेरी माँ के साथ गलत काम कर रहे हैं… डरो मत… हम जल्द निकल जाएँगे। "अगर कहानी पसंद आई हो तो कमेंट में जरूर बताएं। अगला भाग चाहिए तो लिखें।

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