इस Sautan Doodhwala Hindi sex story की शुरुआत लखनऊ की एक सुबह से होती है, जब रिहाना के दरवाज़े की घंटी बजती है। सुबह के साढ़े छह बज रहे थे। लखनऊ की पुरानी गली में अजान की आवाज अभी थमी ही थी।
रिहाना ने दरवाजा खोला। सामने योगेश खड़ा था। हाथ में दूध की बोतल।
साफ धोती-कुरता। माथे पर हल्का पसीना। “आज का दूध,” योगेश ने बोतल बढ़ाई।
रिहाना ने लिया। उँगलियाँ छू गईं। एक पल के लिए दोनों की नजरें मिलीं।
योगेश मुस्कुराया। “कल वाली बात याद है? आपने कहा था कि अकेले चाय पीने में मजा नहीं आता।
”रिहाना ने हल्के से मुस्कुरा दिया। “हाँ… आदत सी पड़ गई है। ”योगेश रोज आता था।
पिछले आठ महीनों से। पहले सिर्फ दूध देता और चला जाता। फिर धीरे-धीरे बातें बढ़ीं।
मौसम की, महंगाई की, गली के कुत्तों की। रिहाना के पति इरशाद की दूसरी बीवी सलमा थी। इरशाद दोनों घरों में समय बाँटता।
हफ्ते में तीन-चार दिन रिहाना के पास रहता। बाकी सलमा के। रिहाना अकेली पड़ गई थी।
रातें लंबी लगतीं। दिल भारी रहता। एक सुबह योगेश ने कहा, “आपका चेहरा आज उदास लग रहा है।
”रिहाना चुप रही। फिर धीरे से बोली, “इरशाद साहब तीन दिन से नहीं आए। सलमा के घर हैं।
”योगेश ने सिर हिलाया। “अकेलापन बुरी चीज है। ”रिहाना ने दरवाजा पूरा खोल दिया।
“अंदर आ जाओ। चाय पी लो। ठंड लग रही होगी।
”योगेश हिचकिचाया लेकिन चला गया। बैठक में बैठकर चाय पीने लगा। रिहाना पास खड़ी रही।
बुरका नहीं पहना था। सिर्फ साड़ी। योगेश की नजर उसके चेहरे से सरककर गर्दन पर गई, फिर नीचे।
रिहाना ने महसूस किया लेकिन कुछ नहीं कहा। उस दिन के बाद योगेश कभी-कभी पाँच-दस मिनट रुकने लगा। बातें गहरी होने लगीं।
रिहाना बताने लगी कैसे इरशाद आता है तो थका रहता है, बात कम करता है, सलमा का नाम ले लेता है। योगेश बताने लगा अपनी पत्नी की। गाँव में रहती है।
बच्चे स्कूल जाते हैं। शहर में अकेला कमरा। दोनों के अकेलेपन ने एक अजीब सा पुल बना दिया।
एक सुबह रिहाना ने कहा, “तुम हिंदू हो। मैं मुसलमान। ये बातें… ठीक नहीं।
”योगेश ने जवाब दिया, “दूध पीने में जात-पात नहीं देखी जाती। दिल की बात में भी नहीं देखनी चाहिए। ”रिहाना चुप हो गई।
दिल की धड़कन तेज हो गई थी। दो हफ्ते बाद एक सुबह इरशाद के आने का कोई इंतजाम नहीं था। रिहाना अकेली थी।
योगेश आया। दूध दिया। रिहाना ने अंदर बुलाया।
इस बार चाय के साथ बातें लंबी चलीं। योगेश ने अचानक रिहाना का हाथ पकड़ लिया। “आपको देखकर लगता है जैसे कोई सुने।
घर में कोई नहीं सुनता। ”रिहाना ने हाथ नहीं छुड़ाया। नजरें मिलीं।
योगेश ने धीरे से उसे अपनी तरफ खींचा। होठों पर होठ रख दिए। रिहाना की साँस रुक गई।
विरोध का शब्द मुँह तक आया लेकिन निकला नहीं। चुंबन गहरा होता गया। योगेश की जीभ उसके मुँह में घुस गई।
रिहाना के हाथ उसके कंधों पर थे। योगेश का हाथ उसकी कमर पर। योगेश ने रिहाना को सोफे पर लिटा दिया।
साड़ी और ब्लाउज धीरे-धीरे हटाए। रिहाना का दूधिया गोरा शरीर सामने आ गया। योगेश ने पहले उसके पूरे शरीर को जीभ से चाटना शुरू किया।
गर्दन से लेकर कंधों तक, फिर बाँहों पर। धीरे-धीरे नीचे सरका। पेट पर जीभ फेरता रहा।
नाभि के आसपास गोल-गोल चाटा। रिहाना की साँसें तेज हो गईं। योगेश ने उसकी बड़ी चूचियों को दोनों हाथों में लिया।
निप्पल पहले से सख्त थे। उसने एक निप्पल को दाँतों से हल्का काटा और फिर जोर से चूसने लगा। दूसरी चूची को हाथ से मसलता रहा।
रिहाना की कमर ऐंठ गई। “आह… योगेश… धीरे…”योगेश ने चूचियों को छोड़कर और नीचे गया। जाँघों के अंदरूनी हिस्से को चाटा।
फिर रिहाना को पलट दिया। गांड के दोनों गालों को फैलाया और जीभ सीधे छेद पर रख दी। जोर से चूसा और चाटा।
जीभ की नोक अंदर तक घुमाने लगा। रिहाना कराह उठी। “वहाँ… मत… अह…” योगेश ने देर तक उसकी गांड चूसी।
फिर उसे फिर से सीधा किया। नाभि को फिर चाटा। उसके बाद सीधे चूत पर मुँह लगा दिया।
गीली चूत को जीभ से चाटने लगा। क्लिटोरिस को चूसा। दो उँगलियाँ अंदर डालकर अंदर-बाहर करने लगा।
रिहाना की टाँगें काँपने लगीं। वह जोर से काँपते हुए झड़ गई। तभी योगेश ने अपना लंड निकाला।
छोटा लेकिन बहुत मोटा। रिहाना की आँखें फटी रह गईं। “इतना… मोटा…” योगेश ने मोटे लंड का सिरा चूत पर रखा और धीरे-धीरे धकेला।
रिहाना चीख पड़ी। “आह… दर्द हो रहा है… बहुत मोटा है…” लेकिन योगेश रुका नहीं। पूरा अंदर कर दिया।
चूत पूरी तरह फैल गई। फिर धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ रिहाना की चूचियाँ हिल रही थीं।
मोटा लंड अंदर-बाहर हो रहा था। रिहाना दर्द और मजे के मिश्रण में कराह रही थी। “जोर से… लेकिन धीरे… फट जाएगा…” योगेश ने गति बढ़ा दी।
रिहाना फिर से झड़ गई। योगेश ने भी उसके अंदर ही छोड़ दिया। दोनों अभी तक बिस्तर पर ही थे कि दरवाजे के पीछे सलमा खड़ी थी।
वह इरशाद का सामान लेने आई थी। दरवाजा अधखुला था। उसने सब देख लिया।
योगेश का मोटा बिना खतना वाला लंड पहली बार देखा। आँखें लाल हो गईं। नशे जैसी अवस्था में फैल गईं।
पैंटी उसकी चूत के पानी से पूरी भीग गई। वह वहीं खड़ी अपनी चूत सहलाती रही। उँगलियाँ अंदर डालकर खुद को सुखाने लगी जबकि अंदर योगेश रिहाना को चोद रहा था।
सलमा की साँसें तेज चल रही थीं। बड़ी-बड़ी आँखों से वह मोटे लंड को निगलती रही। सेक्स खत्म होने के बाद योगेश चला गया।
सलमा अंदर घुसी। रिहाना का चेहरा पीला पड़ गया। सलमा की आँखें अभी भी लाल थीं।
“मैंने सब देख लिया। उस काफिर का मोटा लंड… पहली बार देखा। मेरी पैंटी गीली हो गई।
”रिहाना काँप रही थी। “सलमा… माफ कर दो…”सलमा ने पास आकर कहा, “माफ? मैं इरशाद को सब बता दूँगी।
दोनों घरों में बेइज्जती होगी। जब तक तुम मुझे भी उस योगेश से चोदने नहीं दोगी। उसकी मोटी लंड चाहिए मुझे।
”रिहाना का दिल बैठ गया। “नहीं… वह मेरा है… तुम… तुम ज्यादा खूबसूरत हो। बड़ी चूचियाँ, बड़ी गांड, बिल्कुल पतली कमर।
इरशाद भी तुम्हें ही ज्यादा चोदता है। योगेश तुम्हें देखकर मुझे भूल जाएगा। ”सलमा हँसी।
“इसलिए तो चाहिए। आज रात इरशाद मेरे पास आएगा। सोच लेना।
कल सुबह जवाब देना। ”उस रात इरशाद सलमा के घर आया। सलमा अभी भी योगेश के मोटे लंड की याद में थी।
इरशाद ने उसे नंगा किया। सलमा की बड़ी-बड़ी चूचियाँ और गोल गांड देखकर उसका लंड तन गया। उसने चूचियाँ मसलीं।
निप्पल चूसे। फिर सलमा को घोड़ी बनाकर पीछे से चोदा। जोर-जोर से धक्के लगाए।
सलमा कराह रही थी लेकिन मन में योगेश का मोटा लंड घूम रहा था। इरशाद का लंड पतला लग रहा था। सलमा ने कहा, “और जोर से… आज पूरा फाड़ दो…” इरशाद ने उसकी गांड में भी लंड डाल दिया।
सलमा चीख रही थी। दोनों कई बार झड़े। इरशाद सो गया।
सलमा जागती रही। पैंटी फिर गीली हो गई थी। सुबह रिहाना ने फैसला किया।
वह सलमा के घर गई। “ठीक है। एक बार… सिर्फ एक बार।
लेकिन उसके बाद कभी नहीं। ”सलमा मुस्कुराई। “कल सुबह बुलाना उसे।
”अगली सुबह योगेश रिहाना के घर आया। रिहाना ने दरवाजा खोला। आँखों में डर और असुरक्षा थी।
“आज… सलमा भी आएगी। वह… तुम्हें चाहती है। ”योगेश हैरान रह गया।
लेकिन जब सलमा अंदर आई तो उसकी आँखें फटी रह गईं। सलमा रिहाना से कहीं ज्यादा खूबसूरत थी। दूधिया गोरा शरीर।
बड़ी-बड़ी चूचियाँ। लंबे खड़े निप्पल। गोल और उभरी गांड।
बिल्कुल जीरो फैट। पतली कमर। योगेश का लंड तुरंत तन गया।
सलमा ने कपड़े उतारे। योगेश की आँखें फटी रह गईं। उसने पहले सलमा के पूरे शरीर को चाटना शुरू किया।
गर्दन, कंधे, बड़ी चूचियाँ। लंबे निप्पल को दाँतों से काटा और जोर से चूसा। नाभि चाटी।
फिर सलमा को पलटा। गांड के छेद को जीभ से जोर-जोर से चाटा और चूसा। सलमा कराह रही थी।
“आह… और अंदर चाटो…” योगेश ने उसकी गीली चूत को भी देर तक चाटा। क्लिटोरिस चूसा। फिर योगेश ने अपना मोटा लंड सलमा की चूत पर रखा।
सलमा की आँखें फैल गईं। “इतना मोटा… बिना खतना का…” योगेश ने एक झटके में आधा अंदर धकेल दिया। सलमा चीख पड़ी।
“आह… फाड़ रहा है…” योगेश ने पूरा अंदर कर दिया और पागलों की तरह धक्के लगाने लगा। सलमा की बड़ी चूचियाँ जोर-जोर से हिल रही थीं। योगेश उन्हें मसलता और चूसता रहा।
मोटा लंड चूत को फैला रहा था। सलमा बार-बार झड़ रही थी। फिर योगेश ने सलमा को घोड़ी बना दिया।
गांड के छेद पर थूक लगाया और मोटा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। सलमा की चीख निकल गई। “आह… गांड फट गई… इतना मोटा…” योगेश ने जोर-जोर से धक्के लगाए।
दोनों छेद सूज गए। चूत और गांड दोनों लाल और सूजे हुए थे। योगेश ने आखिर में चूत में जोर से झड़ते हुए सब छोड़ दिया।
गर्म पानी चूत से निकलकर गांड तक बहने लगा। काला मोटा लंड निकला तो दोनों छेद खुले और सूजे हुए दिख रहे थे। सलमा चल नहीं पा रही थी।
टाँगें काँप रही थीं। रिहाना कोने में खड़ी यह सब देख रही थी। दिल में जलन थी।
योगेश सलमा के शरीर पर इस तरह टूटा था जैसे उसने रिहाना के साथ कभी न किया हो। सलमा उठ नहीं पा रही थी। दोपहर को इरशाद आया तो सलमा लेटी हुई थी।
“क्या हुआ? ” इरशाद ने पूछा। सलमा ने दर्द भरी आवाज में कहा, “पैर में मोच आ गई।
चल नहीं पा रही। ”रिहाना जो वहाँ खड़ी थी, उसके गाल लाल हो गए। वह शरमा गई।
नजरें नीचे कर लीं। योगेश चला गया। सलमा रिहाना के पास आई।
आवाज में जीत थी। “अब समझ गई? उसका मोटा लंड… मेरी चूत और गांड दोनों सूज गए हैं।
तू तो सिर्फ सहती थी। मैंने पूरा मजा लिया। ”रिहाना चुप रही।
अंदर जल रही थी। योगेश अब सलमा को पसंद करने लगेगा। इतनी खूबसूरत, इतनी तंग बॉडी।
लेकिन उसके पास कोई चारा नहीं था। सलमा के पास इरशाद को बताने का हथियार था। लखनऊ की उस गली में अब तीनों के बीच एक नया समझौता बन चुका था।
दूध वाली सुबहें अब सिर्फ दूध की नहीं रह गई थीं। रिहाना हर सुबह दरवाजा खोलती तो दिल में डर और जलन दोनों होते। योगेश आता।
कभी रिहाना को चोदता। कभी सलमा को। सलमा की बड़ी चूचियाँ और तंग गांड देखकर योगेश की आँखें हर बार चमकतीं।
रिहाना देखती रह जाती। क्या योगेश अब सिर्फ सलमा को चाहेगा? क्या इरशाद को कभी पता चलेगा?
क्या यह खेल कब तक चलेगा? रिहाना के पास कोई जवाब नहीं था। सिर्फ एक मोटी लंड वाली चाहत थी जो अब दो औरतों के बीच बँट चुकी थी।
अगर आप इस कहानी का दूसरा भाग चाहते हैं जहाँ आगे क्या होता है, सलमा और रिहाना के बीच और उलझाव, योगेश का चयन या इरशाद का शक गहराता है, तो बताइए।