मैं राजू हूँ। बिहार के एक छोटे से गाँव से हूँ। उम्र 26 साल।
बेंगलुरु की एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता हूँ। सुबह 8 से रात 8 तक गेट पर खड़े रहना, गाड़ियाँ चेक करना, कार्ड स्वाइप करवाना… यही मेरी जिंदगी थी। जब तक प्रिया नहीं आई थी।
प्रिया ऑफिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उम्र 26, गोरी-गेहुँआ रंग, 5 फुट 3 इंच लंबी। उसकी चूचियां इतनी गोल और टाइट हैं कि कोई भी टॉप पहन ले, वे साफ उभर आती हैं।
होंठ हमेशा गीले और चमकदार। मैं रोज़ उसे गेट पर देखता और मन ही मन लंड सख्त कर लेता। शुरुआत छोटी-छोटी मदद से हुई।
कई बार उसका एक्सेस कार्ड स्वाइप नहीं होता। कभी बैग में नहीं मिलता, कभी घर भूल जाती। मैंने बिना कार्ड के कई बार उसे अंदर भेज दिया।
वह शर्माते हुए मुस्कुराती और कहती, “थैंक यू राजू… आज फिर बचा लिया तुमने। ”धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं। वह कभी-कभी देर शाम रुककर मुझसे पूछती, “बिहार में घर कैसा है?
अकेले रहते हो क्या? ” मैं भी बताता। एक दिन उसने सीधे पूछ लिया, “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?
” मैंने कहा नहीं। उसने हँसकर कहा, “अच्छा… तो तन्हाई में कैसे कटती है रात? ”उस दिन के बाद हवा बदल गई।
एक शुक्रवार की शाम वह फिर कार्ड भूलकर आई। गेट पर भीड़ कम थी। मैंने उसे अंदर भेजते हुए हल्के में कहा, “मैडम, रोज-रोज मदद कर रहा हूँ… कुछ तो मिलना चाहिए।
”प्रिया ने मेरी आँखों में देखा और धीरे से बोली, “आज ड्यूटी कब खत्म होती है? ”“8 बजे। ”“8:15 पर गेट के बाहर मिल।
आज तुझे एक ऐसी जगह ले चलती हूँ जहाँ तुम कभी नहीं गए होंगे। ”मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। ड्यूटी खत्म होते ही मैंने यूनिफॉर्म का शर्ट खोला, सादी टी-शर्ट पहन ली और बाहर निकल आया।
प्रिया एक सफेद क्रेटा से आई। उसने काली बॉडीकॉन ड्रेस पहनी थी जो उसकी चूचियों और गांड़ पर एकदम चिपक रही थी। वह मुस्कुराई, “चलो राजू… आज तुम्हारी जिंदगी बदलने वाली है।
”हम एक बड़े 5 स्टार होटल पहुँचे। लॉबी देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। इतना बड़ा झूमर, मार्बल फर्श, अत्तर की खुशबू… मैंने कभी सपने में भी ऐसी जगह नहीं देखी थी।
प्रिया ने आसानी से चेक-इन करवाया और हमें 12वीं मंजिल का सुइट रूम मिला। कमरे में घुसते ही मैं हैरान रह गया। बादशाहों जैसा बिस्तर, अलग बाथटब, शहर का नजारा।
प्रिया ने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे पास आकर बोली, “अब बता… कैसा लग रहा है गाँव वाले को? ”मैंने कुछ कहा नहीं। बस उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होंठों पर टूट पड़ा।
हम पागलों की तरह चूमने लगे। मैंने उसकी ड्रेस के जिप नीचे की और उसे नंगी कर दिया। उसकी चूचियां झटके से बाहर आ गईं।
मैंने दोनों को हाथों में लिया और जोर-जोर से दबाया, फिर मुंह में लेकर चूसने लगा। “आह्ह… हल्के से काटो राजू…” वह कराह रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया।
उसकी लेस वाली पैंटी पहले से गीली थी। मैंने पैंटी को मुंह से खींचकर उतारा और उसकी चूत पर झपट पड़ा। जीभ निकालकर उसकी चूत के होठों को चाटने लगा, क्लिट को मुंह में लेकर जोर से चूसा।
प्रिया के दोनों पैर मेरे सिर के दो तरफ कांप रहे थे। “हाँ चूसो… मेरी चूत चूसो गार्ड…” वह अपने ही शब्दों से उत्तेजित हो रही थी। मैंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और तेजी से पेलने लगा।
थोड़ी देर में वह जोर से चीखते हुए झड़ गई। उसका पानी मेरे मुंह और गालों पर लग गया। फिर वह उठ बैठी, मेरे पेंट के बटन खोले और लंड बाहर निकाला।
“इतना मोटा लंड… गाँव में क्या खिलाते हैं तुम्हें! ” कहकर उसने लंड पर थूका और मुंह में ले लिया। गले तक धकेल दिया।
आँखों से आँसू बहने लगे लेकिन वह रुक नहीं रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में जोर-जोर से लंड ठोकना शुरू कर दिया। “गला फाड़… रंडी की तरह चूस…” मैं गुर्रा रहा था।
जब और बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उसे चारों हाथ-पैरों पर कर दिया। उसकी बड़ी गोल गांड़ मेरे सामने थी। मैंने थूक लगाकर अपना लंड उसकी चूत में एक झटके में धंस दिया।
दोनों एक साथ कराह उठे। मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से पेलना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ उसकी गांड़ मेरे पेट से टकरा रही थी।
थप्पड़ मार-मारकर मैंने उसकी गांड़ लाल कर दी। “और जोर से… तोड़ डाल मेरी चूत…” प्रिया चिल्ला रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और और तेज चोदने लगा।
थोड़ी देर बाद मैंने लंड बाहर निकाला, कंडोम फेंका और उसकी चूत के अंदर ही अपना गाढ़ा माल छोड़ दिया। वीर्य इतना निकला कि बाहर बहने लगा। हम दोनों बिस्तर पर गिर पड़े।
प्रिया ने मेरे सीने पर सिर रखकर कहा, “यह तो बस ट्रायल था राजू। कल से असली खेल शुरू होगा। ”अगले दिन उसने मुझे फिर उसी होटल में बुलाया।
इस बार उसके साथ दो और लड़कियाँ थीं — उसकी ऑफिस कॉलीग श्रुति और मेघना। दोनों भी लगभग उसी उम्र की, अच्छी खासी बॉडी वाली। प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “राजू, ये दोनों मेरी बहुत करीबी सहेलियाँ हैं।
आज तुझे तीनों को खुश करना है। ”मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। पहले प्रिया ने ही मुझे नंगा किया और तीनों लड़कियों के सामने मेरे लंड को मुंह में लिया।
फिर श्रुति और मेघना भी बिस्तर पर आ गईं। तीनों ने बारी-बारी से मेरे लंड को चूसा। एक मुंह में लेती, दूसरी अंडकोष चाटती, तीसरी मेरी उंगलियां अपनी चूत में डालकर खुद को हिलाती।
मैंने पहले श्रुति को पेट के बल लिटाया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया। प्रिया उसके मुंह पर बैठ गई और मेघना मेरे मुंह में अपनी चूत दबा रही थी। कमरे में सिर्फ चपत-चपत की आवाज और कराहें गूंज रही थीं।
फिर मैंने मेघना को उठाया और खड़े-खड़े उसकी गांड़ के बल दीवार से सटाकर चोदा। प्रिया और श्रुति दोनों एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। रात भर हमने पोजीशन बदल-बदलकर चुदाई की।
तीनों की चूत और गांड़ मेरे लंड और उंगलियों से भर चुकी थीं। आखिर में मैंने तीनों के मुंह में बारी-बारी से माल झाड़ा। सुबह जब मैं उठा तो तीनों नंगी सो रही थीं।
बिस्तर पर वीर्य और रस के धब्बे फैले हुए थे। प्रिया ने आँखें खोलकर मुस्कुराते हुए कहा, “अब तुम सिर्फ गार्ड नहीं रहे राजू… तुम हमारी निजी लंड मशीन हो। ”उसके बाद लगभग हर दूसरे हफ्ते प्रिया मुझे 5 स्टार होटल में ले जाती।
कभी अकेले, कभी अपनी सहेलियों के साथ। कभी-कभी वह मुझे ऑफिस की पार्टी के बाद भी बुला लेती। मैं, जो कभी गाँव के कुएँ पर नहाता था, अब 5 स्टार के बाथटब में अमीर लड़कियों की चूत और गांड़ चोदता था।
प्रिया ने मुझे बिगाड़ दिया था… और मैं खुशी-खुशी बिगड़ रहा था। प्रिया के साथ वो पहली 5 स्टार वाली रात और फिर उसकी सहेलियों वाली रात के बाद मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। अब मैं सिर्फ सिक्योरिटी गार्ड नहीं रह गया था।
प्रिया मुझे अपना “प्राइवेट लंड” कहने लगी थी। दूसरे हफ्ते गुरुवार की रात को उसका मैसेज आया —“राजू, कल रात 9 बजे उसी होटल में आना। आज अकेली नहीं हूँ।
एक नई लड़की है। तैयार रहना। ”शुक्रवार को ड्यूटी खत्म करते ही मैंने जल्दी से नहाया, साफ कपड़े पहने और टैक्सी पकड़ ली।
होटल पहुँचकर उसी सुइट रूम में गया। दरवाजा खुलते ही मेरी आँखें फटी रह गईं। प्रिया तो थी ही, उसके साथ एक नई लड़की थी — लंबी, गेहुँआ रंग, बहुत गठीला बदन।
नाम था आंचल। वह प्रिया की पुरानी कॉलेज फ्रेंड थी और अभी एक अलग कंपनी में मैनेजर थी। आंचल ने सिर्फ एक छोटी सी सिल्क ड्रेस पहनी हुई थी, जिसके नीचे कुछ भी नहीं था।
उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ड्रेस के ऊपर से साफ दिख रही थीं। प्रिया मुस्कुराई, “राजू, ये आंचल है। आज तुझे इसे संभालना है।
मैं सिर्फ देखूँगी… और कभी-कभी शामिल भी हो जाऊँगी। ”आंचल ने मुझे ऊपर से नीचे तक घूरा और बोली, “प्रिया बहुत तारीफ कर रही थी तेरे लंड की… दिखा तो सही। ”मैंने अपने पेंट के बटन खोले।
लंड झटके से बाहर निकल आया, पहले से आधा खड़ा। आंचल की आँखें चमक उठीं। वह पास आई, लंड को हाथ में लिया और हल्के से दबाने लगी।
“म्म… सही में मोटा है। ” इतना कहकर उसने झुककर लंड पर थूका और मुंह में ले लिया। एकदम गले तक।
प्रिया पीछे से आकर मेरे होंठों पर किس करने लगी और मेरी टी-शर्ट उतारने लगी। आंचल बहुत जोश से लंड चूस रही थी। कभी सिर्फ टोपा चूसती, कभी पूरा अंदर ले जाती।
गले से आवाजें आ रही थीं — घप्प… घप्प… घप्प…। मैंने उसके बाल पकड़कर और गहराई तक ठोकना शुरू कर दिया। आँसू उसकी आँखों से बह रहे थे लेकिन वह रुक नहीं रही थी।
प्रिया ने कपड़े उतार दिए और बिस्तर पर लेट गई। उसने अपनी टांगें फैला दीं और बोली, “आंचल, अब राजू को चूत चाटने दे… तू मेरे पास आ। ”मैंने आंचल को उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया।
उसकी चूत पहले से गीली चमक रही थी। मैंने जीभ निकालकर उसके चूत के होठों को जोर-जोर से चाटा, क्लिट को दांतों से हल्का काटा। आंचल मचलने लगी।
प्रिया उसके मुंह पर बैठ गई और आंचल प्रिया की चूत चाटने लगी। मैंने दो उंगलियां आंचल की चूत में डाल दीं और तेजी से पेलने लगा। साथ ही उसकी गांड़ के छेद पर भी उंगली घुमाने लगा।
आंचल जोर से कराह उठी। थोड़ी देर में वह कांपते हुए झड़ गई। उसका पानी मेरे चेहरे पर लग गया।
फिर मैंने अपना लंड उसके मुंह से निकाला और सीधा उसकी चूत में डाल दिया। एक लंबा जोरदार धक्का। आंचल चीख पड़ी।
मैंने उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और गहरे-गहरे पेलने लगा। प्रिया बगल में बैठकर आंचल की चूचियां दबा रही थी और कभी-कभी मेरे होंठ चूम लेती। “और जोर से राजू… इसे फाड़ दे…” प्रिया उत्तेजित होकर बोल रही थी।
मैंने आंचल को घुमाया और कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। उसकी बड़ी गांड़ मेरे सामने थी। मैंने थूक लगाकर पहले उसकी चूत में लंड डाला, फिर धीरे-धीरे गांड़ के छेद पर लगाने लगा।
आंचल तनाव में आ गई। “धीरे… पहली बार है गांड़ में…” वह बोली। मैंने धीरे-धीरे आधा लंड उसकी गांड़ में धंसाना शुरू किया।
आंचल के मुंह से दर्द और मजे की मिली-जुली आवाजें आ रही थीं। प्रिया उसके मुंह में अपनी चूत दबाकर उसकी चीखें दबा रही थी। जब पूरा लंड गांड़ में चला गया तो मैंने जोर-जोर से पेलना शुरू कर दिया।
आंचल की गांड़ मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने लंड बाहर निकाला और प्रिया की चूत में डाल दिया। अब दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे के ऊपर थीं।
मैं बारी-बारी से एक की चूत और दूसरी की गांड़ चोद रहा था। कमरे में सिर्फ मांस और पसीने की आवाजें गूंज रही थीं। आखिर में मैंने आंचल को पीठ के बल लिटाया, उसकी टांगें फैलाईं और उसकी चूत के अंदर ही अपना पूरा गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया।
इतना माल निकला कि बाहर निकलकर उसकी गांड़ तक बह गया। प्रिया ने झुककर वह वीर्य चाट लिया और फिर आंचल को चुंबन में वह स्वाद दे दिया। हम तीनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े।
आंचल ने हांफते हुए कहा, “प्रिया… तूने सच कहा था। ये लंड नशा है। ”प्रिया मुस्कुराई और मेरे लंड को हाथ में लेते हुए बोली, “नशा तो अभी शुरू ही हुआ है।
अगले हफ्ते मेरी एक और सहेली आ रही है… दिल्ली से। उसे भी यही नशा चखवाना है। ”मैंने दोनों को अपनी बाँहों में भरते हुए सोचा — गाँव का गरीब लड़का आज 5 स्टार होटल में अमीर लड़कियों की चूत और गांड़ चोद रहा है।
प्रिया ने मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया था। और मैं जानता था… यह सिलसिला अब रुकने वाला नहीं था।