दोस्तो, हमारे देश में गोरे रंग को लेकर लोग बहुत ज्यादा खर्चा करते हैं। खास तौर से लड़कियां तो धूम से पैसे उड़ाती हैं। उनका सबसे ज्यादा खर्च ब्यूटी पार्लर के लिए ही होता है।
हालांकि मैं अपनी पसंद की बात कहूं, तो मुझे थोड़ी सांवली लड़की ज्यादा हॉट लगती है। उसमें वो बात होती है, जो गोरी लड़की में नहीं होती है। गोरी लड़कियां अपने रूप को लेकर भाव बहुत खाती हैं और उनका एटीट्यूड तो भगवान कसम दिमाग ही पागल कर देता है।
वे वाली लौंडियां आसानी से पटती भी नहीं हैं। आज मैं जिस लड़की की बात कर रहा हूं, उसका नाम प्रिया था। प्रिया का रंग थोड़ा सा गेहुंआ था।
वो काले लंबे घुंघराले बालों वाली एकदम सिंपल सी लड़की थी। लेकिन उसकी जो खास बात थी कि उसका बदन बड़ा हरा-भरा था। उसकी टाइट स्कर्ट में थिरकते हुए उसके गोल गोल फुटबॉल जैसे चूतड़ मेरे लंड पर समझो बिजली ही गिरा देते थे।
उसकी पतली कमर के नीचे बड़ी बॉम्ब जैसी गांड़ देख लो, या तनी हुई मस्त चूचियां हों, या स्लिम पेट हो। प्रिया ऊपर से नीचे तक पटाखा माल थी। जब वो जींस पहनकर कॉलेज के लिए निकलती थी, तो वो अपने मम्मों और गांड़ को ऐसे हिलाकर चलती थी कि किसी राह चलते बुड्ढे का भी लंड खड़ा हो जाए।
प्रिया अपने मम्मी-पापा के साथ रहती थी। कॉलेज से आकर वो सीधे अपने फ्लैट में घुस जाती थी। शायद उसे अपने सांवले होने की वजह से सोशल होने में डर लगता होगा।
लेकिन मुझे वो बड़ी सेक्सी लगती थी। हम लोग ५वीं मंजिल पर रहते थे। एक दिन मैं कुछ सामान लेने के लिए लिफ्ट से नीचे जाने को आ रहा था, तो वो लिफ्ट में अकेली खड़ी थी और दरवाजा खुला था।
मैं लिफ्ट में घुसने को ही था कि उसने कहा- अंदर आ रहे हो या लिफ्ट का दरवाजा बंद कर दूं? मैंने कहा- नहीं रुको… मैं भी नीचे ही जा रहा हूं। ये कहकर मैं लिफ्ट में घुस गया।
ये मौका मैं गंवाना नहीं चाहता था। दरवाजा बंद हुआ और उसने बटन दबाया तो लिफ्ट नीचे की ओर चलने लगी। मैंने उससे पूछा- तुम इतना कम क्यों दिखती हो?
वो चौंक गई- क्या?? मैं बोला- मतलब, तुम लोगों के साथ ज्यादा बात नहीं करती हो न, बस इसलिए कह रहा था। वो मुस्कुराई- वो तो मैं बस ऐसे ही।
ये कहकर वो अपनी झुल्फों के साथ खेलने लगी। कसम से वो शरमाती थी, तो बहुत हॉट हो जाती थी। मैंने उसकी तारीफ करना शुरू कर दिया- तुम बहुत अच्छी लगती हो, तुम्हारे लंबे बाल तुम पर काफी जंचते हैं।
मेरा ये कहना था कि दो पल के लिए वो मेरे सामने देखती रही। फिर बोली- मजाक कर रहे हो? मैं- नहीं… सच मैं तुम खूबसूरत हो।
इस बात पर जोर से हंसने लगी- मेरे साथ फ्लर्ट कर रहे हो, मैं सबको बता दूंगी। मैं- नहीं यार, मैं सच कह रहा हूं। इतने में लिफ्ट नीचे आ गई।
प्रिया बाहर निकलकर चलने लगी और पीछे मुड़कर बार-बार मुझे देखकर स्माइल करने लगी। मैंने सोच लिया कि बस… अब ये माल पक्की मेरे हाथ में आ गई। मैं उसकी तरफ से खुद को आशावान समझने लगा।
दूसरे दिन से आए दिन लिफ्ट में उससे मुलाकात होने लगी। एक दिन उसने मुझसे मेरा फोन नंबर मांगा। मैंने दे दिया।
उस दिन के बाद से मेरी उससे व्हाट्सएप पर बात होने लगी। कोई पंद्रह दिनों में ही हम दोनों एक-दूसरे से एकदम से खुल गए थे। फिर उस दिन उसके मम्मी-पापा कहीं बाहर गए थे और वो घर में अकेली थी।
उसने मुझे फोन किया- हैलो, क्या तुम यहां आ सकते हो, मैं बोर हो गई हूं। सबके कमरे बंद थे और मैं इधर-उधर देखता हुआ उसके दरवाजे के पास गया। उसने दरवाजा खुला ही रखा था।
मैं अंदर गया, तो प्रिया सोफा पर बैठी थी। आज वो एक छोटी सी कैप्री पहनकर बैठी थी। उसके दोनों चिकने पैर काफी मादक लग रहे थे।
यदि वो सांवली न होती, तो बिल्कुल कैटरिना कैफ जैसी लग रही थी। प्रिया अपने एक पैर को दूसरे पैर पर चढ़ाए हुए बैठी थी, जिससे उसकी मोटी गांड़ बाहर को निकली दिख रही थी। मैं तो उसे इस तरह से देखकर पागल ही हो रहा था।
उसने मुझे देखकर कहा- आओ अंदर आ जाओ, बैठो। मैंने उससे हैलो कहता हुआ उसके सोफे पर ही बैठने को बढ़ा। प्रिया- पानी पियोगे… या चाय बना दूं?
मैं- नहीं बस शुक्रिया। मैं उसकी बगल में जाकर बैठ गया। उसे देखकर लग रहा था कि वो अभी नहाकर ही आई है।
कमरे की हवा में उसके बदन से बहुत अच्छे किस्म के परफ्यूम की महक फैल गई थी। मैं उस महक को सूंघते हुए आह करने लगा। वो बोली- क्या हुआ?
मैंने कहा- बड़ी मस्त महक आ रही है। वो मुस्कुरा दी- फिर से चालू हो गए। मैंने हंसकर कहा- क्या यार… किसी अच्छी महक की बात भी न करूं, वैसे एक बात है, आजकल तुम कुछ ज्यादा ही सजने-संवरने लगी हो।
वो मेरी तरफ देखने लगी। तो मैंने पूछ लिया- कोई बॉयफ्रेंड बना लिया है क्या? प्रिया हंसी और बोली- ना रे बाबा, मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है… बस ऐसे ही।
वैसे मैं तुम्हें कैसी लगती हूं? मैं- मुझे?? प्रिया बोली- हां तुम्हें।
मैं जानती हूं तुम मुझे बहुत देखते हो… मेरे बारे में तुम क्या सोचते हो! उसने जब इतना खुलकर पूछ लिया तो मैंने भी बिंदास कह दिया- तुम कमाल की सेक्सी हो। ये पता नहीं कैसे, मेरे मुंह से निकल गया।
मगर अगला पल बहुत ही रोमांचक था, जिसका मुझे अहसास ही नहीं था कि इतनी जल्दी ये सब भी हो सकता है। वो एकदम से उठी और मेरे ऊपर बैठ गई। मैंने सोचा भी न था कि ऐसा होगा।
उसके मेरी गोद में बैठते ही मेरे तो समझो तोते उड़ गए थे। उसकी बड़ी सी मुलायम गांड़ मेरी गोद में जम गई थी। वो मेरे कान में सरसराते हुए बोली- सच बोलो… तुमको मैं क्या इतनी सेक्सी लगती हूं?
उसकी इस बात पर मैंने उसकी कमर को जकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया। वो भी मेरे सीने से लिपट गई और मुझे जोर से हग देने लगी। उसके तने हुए मम्मे मेरी छाती में बड़ा सुकून दे रहे थे।
वो बोली- मैं बहुत पागल हो रही हूं, क्या तुम मुझे किस करोगे? मैं तो न जाने कब से बस यही चाहता था। मैंने अगले ही अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
आह… मेरे पूरे बदन में बिजली सी कौंध गई, रौंगटे खड़े हो गए। हम दोनों एक-दूसरे से पेड़ और लता की तरह चिपककर चुम्मा-चाटी करने लगे। हमारे चुम्बनों की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं।
मैं आगे हाथ ले जाकर उसकी गांड़ को मसलने लगा। कमाल की हॉट थी प्रिया। साली दिखने में इतनी शरीफ लड़की इतनी कामुक होगी, मुझे पता ही न था।
प्रिया मेरी जीभ को अपने मुंह में लेकर चाटने-चूसने लगी थी। हम दोनों में काफी लंबा किस हुआ। उसकी सांसें तेज हो गई थीं।
साथ ही सांस लेने से उसकी चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थीं। एक मिनट के बाद वो मेरे होंठों से अलग हुई और घबराई सी मुझे देखने लगी। वो- ये मेरा पहला किस है।
मैं- हां… पर तुम किस तो ऐसे कर रही थी, जैसे चुम्मी की मास्टर हो। प्रिया ने कहा- वो तो सब पोर्न देखकर ही सीख लिया था। मैंने कहा- पोर्न देखकर और क्या-क्या सीखा है जान?
वो हंस दी और मेरे गालों को फिर से चूमने लगी- मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो। मैंने फिर से उसकी गांड़ पर हाथ फेरा, उसकी पतले कपड़े की कैपरी कुछ भीगी हो गई थी। शायद उसकी चूत रस छोड़ने लगी थी।
मैं सोफा पर पैर पसारे हुए बैठा था और वो मेरी गोद में चुदाई की पोजीशन में बैठी थी। मैंने कहा- चलो अब वो सब दिखाओ, जो तुमने पोर्न से सीखा है। उसने नशीली आंखों से मुझे देखते हुए मेरी टी-शर्ट को नीचे से उठाया, मैंने अपने हाथ ऊपर कर दिए और उसने मेरी छाती को नंगा कर दिया।
इस तरह से मैंने भी उसकी सामने से खुलने वाली शर्ट के बटन खोले और अंदर से बिना ब्रा के तनी हुई उसकी रसीली चूचियों को चूसने लगा। उसने अपने हाथ से एक चूची मेरे मुंह में ठेल दी और मैं उसकी चूची की मिठास लेने लगा। फिर दो मिनट बाद उसने मेरी गोद से उठकर अपनी कैप्री नीचे खिसका दी।
पापा कसम, साली ने चुदने का पूरा प्रोग्राम सैट किया हुआ था। नीचे पैंटी थी ही नहीं। सफाचट चिकनी चूत मेरे सामने खुल गई थी।
मैंने भी अपने लोअर को नीचे खिसकाने का उपक्रम किया, तो उसने अपने हाथों से मेरे लोअर को चड्डी समेत नीचे कर दिया। अब हम दोनों के सारे कपड़े निकल गए थे और हम दोनों नंगे थे। मेरा लंड फुंफकार रहा था।
वो हॉट गर्ल सेक्स भरी नशीली अदा से सोफे के नीचे बैठी और मेरे लंड को मुंह से चूसने लगी। मैंने अपनी किस्मत पर रश्क किया कि वाह रे बनाने वाले तूने भी क्या नसीब दिया है। वो एक मिनट तक लंड चूसती रही।
फिर वो लपककर मेरे लंड पर चूत सैट करके बैठ गई। मैंने नीचे से अपनी गांड़ को उठाया, तो उसकी चूत को चीरता हुआ लंड अंदर घुसने लगा। वो लंड लेते ही एकदम से तड़फ उठी।
उसे अहसास ही नहीं था कि पहली बार लंड चूत में घुसता है, तो कितना दर्द होता है। खैर… किसी तरह से लंड चूत की दोस्ती हो गई और चुदाई शुरू हो गई। वो अपनी गांड़ उछालते हुए मेरे लंड को चोदने लगी।
प्रिया के लंबे बाल हवा में झूल रहे थे और मैं उसके पतले पेट को पकड़कर उसके चूचुकों को चूसते हुए उसकी चूत चुदाई कर रहा था। प्रिया के निप्पल गुलाबजामुन जैसे रसभरे थे। उसके डार्क कलर के कड़क चूचुक शानदार मम्मों पर मुकुट से खड़े थे।
मैं उसके दोनों निप्पलों को बारी-बारी से मस्ती से चूस रहा था। वो चिल्ला-चिल्लाकर गांड़ उठाकर लंड पर पटक रही थी। प्रिया- ओह यस हनी… फक माय पुसी… आह भैन के लौड़े तेरा लंड तो बड़ा कड़क है… आह मेरा पानी निकल गया चुतिये साले तेज तेज चोद मुझे आह चो…द… दे…वो झड़ गई थी और मैं उसकी गीली हो चुकी चूत में लंड के झटके दिए जा रहे थे।
वो मेरे सीने पर निढाल पड़ी लंड की चोटों को सहन कर रही थी। फिर वो दुबारा गर्म हो गई। अब कभी वो फास्ट स्पीड में गांड़ हिलाती, तो कभी हौले से लंड को सुपारे तक बाहर निकालकर वापस पूरा अंदर तक डाल लेती।
कुछ देर बाद वो मेरी गोद से नीचे उतर आई और उसने नीचे बैठकर अपने दोनों मम्मों को हाथ से दबा लिया। उसके दोनों मम्मों के बीच में मेरे लंड को फंसा कर उसने लंड की बूब फकिंग शुरू कर दी। मैंने भी उसकी वासना को समझा और अपने कड़क लंड को उसके मम्मों के बीच रखकर प्रिया की स्तन चुदाई करने लगा।
आह क्या कोमल छाती थी उसकी… मजा आ रहा था। प्रिया तो पागल हुई जा रही थी- आह साले… फाड़ दे इसे। एक-दो मिनट तक लंड को मम्मों में रगड़ा फिर मैंने प्रिया को सोफा से लगाकर खड़ा किया और उसे घोड़ी बनाकर पीछे से लंड पेल दिया।
लंड अंदर घुसा तो उसकी मीठी आह निकल गई। दो-तीन शॉट में ही अब वो अपनी गांड़ हिलाते हुए खूब मजा ले रही थी। मैंने भी साली जबरदस्त चोदा, उसे चोद-चोदकर मैंने थका दिया।
आखिर में इसी डॉगी स्टाइल में प्रिया की गांड़ पर चांटा मारते हुए मैं उसकी पसीने से भीगी कमर को पकड़कर पिस्टन की तरह उसकी चूत चोदने लगा। उसकी गांड़ पर मेरे हाथों के निशान बन गए थे। मैंने देर तक उसकी चूत में लंड पेलता रहा।
फिर डॉगी पोजीशन में ही मैंने प्रिया के दोनों हाथ पकड़ लिए और धकापेल लंड अंदर-बाहर करने लगा। वो सेक्सी आवाजें करके चुदाई का मजा ले रही थी। कोई आधे घंटे तक लगातार चुदाई के बाद प्रिया रोने लगी- हाय रब्बा, मेरी जान निकल जाएगी, थोड़ा धीरे चोद साले… मर गई मैं तो हरामी… आज ही पूरा चोद लेगा क्या!
मैं उसकी हालत पर मस्त हो रहा था और अब मेरा लावा भी निकलने वाला था। लंड पर कंडोम तो लगा ही नहीं था, इसलिए झड़ने के पहले मैंने जल्दी से लंड को बाहर निकालकर सारा माल उसकी गांड़ पर फैला दिया। मेरे वीर्य की पिचकारी इतनी जोर से उड़ी थी कि उसकी गर्दन पर जाकर गिरी।
मेरे वीर्य की धारा उसकी गर्दन से होते हुए नीचे बहने लगी। प्रिया बहुत खुश हो गई थी- वाह लौंडे, तेरा वीर्य तो समंदर है, पूरी भीग गई मैं! उसने अपनी चूचियों पर बहकर आ रहे वीर्य को उंगली से ले लिया और मुंह में रख लिया।
प्रिया- हम्म… तेरा माल तो मधु जैसा मीठा है। क्या खाता है तू? फिर वो हंसने लगी।
वो अभी भी सोफे से टिकी कुतिया ही बनी हुई थी। इसी पोजीशन में प्रिया अपनी गांड़ हिलाने लगी। प्रिया- थैंक्यू जान यू आर ग्रेट फकर… अब जाओ, मम्मी-पापा आ जाएंगे।
लेकिन मैं नहीं गया। मैं उसकी गांड़ के छेद को चाटने लगा। वो मचल गई- हाय रे ये भी लेगा क्या… मैंने पोर्न में देखा था, गांड़ में लंड लेने से भी बहुत मजा आता है, लेकिन वो अगली बार लूंगी।
प्लीज अभी तू जा। मैं- पर मैंने तो तेरी चूत का स्वाद अभी लिया ही नहीं! प्रिया बोली- ओफो… मरवाएगा क्या?
ले जल्दी से चूत भी चाट ले। वो सीधी हो गई और मैं उसकी चूत चाटने लगा। एक तो प्रिया पहले से ही काफी गर्म थी और उसकी चूत ने पानी भी छोड़ दिया था।
मेरी चूत चटाई से वो हॉट गर्ल सेक्स से कांपने लगी- आह प्लीज अब जाओ। मेरा सुख पूरा हो गया था। मैं जल्दी कपड़े पहनकर उसके फ्लैट से बाहर निकल गया।
उस पहली चुदाई के बाद प्रिया पूरी तरह बदल गई थी। पहले वो शर्मीली और चुपचाप रहने वाली लड़की लगती थी, लेकिन अब उसकी नजरों में एक भूख थी जो साफ दिखती थी। हर बार जब हम लिफ्ट में मिलते, वो मुझे ऐसे देखती जैसे मेरे कपड़ों के अंदर झांक रही हो।
व्हाट्सएप पर उसकी बातें और ज्यादा गंदी हो गई थीं। रात को वो लिखती, “विक्रम… आज मेरी चूत बहुत गीली है। याद आ रही है तेरे मोटे लंड की।
कब चोदेगा फिर? ”मैं भी उसका इंतजार कर रहा था। तीन दिन बाद मौका मिला।
उसके मम्मी-पापा फिर कहीं रिश्तेदारों के घर गए थे और रात को ही लौटने वाले थे। शाम को साढ़े छह बजे उसका फोन आया। “आ जा… दरवाजा खुला है।
”मैं जल्दी से उसके फ्लैट में पहुंचा। प्रिया इस बार और भी बोल्ड थी। उसने सिर्फ एक छोटी सी नाइट ड्रेस पहनी हुई थी, नीचे कुछ नहीं।
जैसे ही मैं अंदर घुसा, उसने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे गले लग गई। “आज पूरा दिन सोच रही थी… तेरा लंड मेरे मुंह में, मेरी चूत में, मेरी गांड़ में…” उसने मेरे कान में फुसफुसाया और मेरे होंठ चूसने लगी। किस इतना गहरा और भूखा था कि हम दोनों दीवार से सट गए।
मैंने उसकी नाइट ड्रेस ऊपर खींची और उसके नंगे बदन को महसूस किया। उसकी चूचियां पहले से ज्यादा तनी हुई थीं, निप्पल सख्त। मैंने दोनों को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा।
“आह… विक्रम… काटो… और जोर से चूसो… हां… ऐसे ही…”प्रिया मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को अपनी छाती में दबा रही थी। मैंने उसे उठाकर सोफे पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैला दीं।
उसकी चूत पहले से चमक रही थी, रस टपक रहा था। मैंने जीभ लगा दी। पहले क्लिट को चूसा, फिर जीभ अंदर डालकर चोदने लगा।
“आह्ह्ह… विक्रम… चूसो मेरी चूत… हां… वहीं… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं…”मैंने उसकी जांघें पकड़कर चूत को और खोल दिया और पूरी ताकत से चाटने लगा। प्रिया की कमर उछल रही थी। दो मिनट में ही वो जोर से कराहते हुए झड़ गई।
उसका रस मेरे मुंह में भर गया। अब मैंने अपना लंड निकाला। प्रिया घुटनों के बल बैठ गई और बिना कुछ कहे उसे मुंह में ले लिया।
इस बार वो और हिम्मत से चूस रही थी। पूरा गला तक उतार रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे मुंह चोदने लगा।
“आह… प्रिया… बहुत अच्छा चूस रही हो… पूरा निगल लो…”कुछ देर बाद मैंने उसे उठाया और घोड़ी बना दिया। पीछे से खड़ा होकर उसका लंड चूत पर रगड़ा और एक जोरदार झटके में पूरा घुसा दिया। “आआह… फाड़ दी… विक्रम… तेरा लंड बहुत मोटा है… जोर से चोदो…”मैंने उसकी कमर पकड़कर तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए।
हर धक्के पर उसकी गांड़ मेरे पेट से टकरा रही थी। पट-पट की आवाज कमरे में गूंज रही थी। मैंने उसकी गांड़ पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे।
“साली… तेरी गांड़ कितनी मस्त है… आज गांड़ भी चोदूंगा…”प्रिया कराह रही थी, “हां… चोदो… फाड़ दो मेरी चूत… और तेज… मैं तुम्हारी रंडी हूं…”मैंने स्पीड बढ़ा दी। उसकी चूचियां लहरा रही थीं। थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकाला और उसकी गांड़ के छेद पर लगाया।
पहले उंगली डाली, फिर दूसरा, फिर लंड सेट करके धीरे से धक्का मारा। “आह… धीरे… दर्द हो रहा है… लेकिन मत निकालो…”मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी गांड़ में घुसा दिया। प्रिया तकिए में मुंह दबाकर चीख रही थी।
फिर मैंने चोदना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेजी से। “आह्ह… विक्रम… गांड़ फाड़ दी… मजा आ रहा है… जोर से… थप्पड़ मारो…”मैंने उसकी गांड़ पर थप्पड़ मारते हुए चोदा।
दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाते हुए। प्रिया बार-बार झड़ रही थी। आखिरकार मैं भी झड़ गया।
गर्म वीर्य की धार उसकी गांड़ में भर गई। हम दोनों पसीने से तर सोफे पर गिर पड़े। प्रिया मेरे सीने पर सिर रखकर बोली, “विक्रम… अब मैं रोज चुदना चाहती हूं।
तेरे लंड के बिना मेरी चूत शांत नहीं होती। ”मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “जब भी मौका मिलेगा, चोदूंगा। आज तो अभी रात बाकी है।
”थोड़ी देर आराम करने के बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। प्रिया मुस्कुराई और खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। इस बार वो खुद लंड को अपनी चूत में बैठाकर उछलने लगी।
उसकी चूचियां मेरे मुंह के सामने थीं। मैं उन्हें चूसता रहा जबकि वो तेजी से गांड़ हिलाकर चुद रही थी। “आह… विक्रम… देख… मैं खुद चोद रही हूं… तेरा लंड मेरी चूत खा रही है…”हमने उस रात चार बार चुदाई की।
अलग-अलग पोजीशन में। एक बार मैंने उसे दीवार से लगाकर उठाकर चोदा। एक बार उसने मुझे चूसाते हुए खुद उंगलियों से अपनी चूत चोदी।
आखिर में हम दोनों थककर सो गए। सुबह उसके मम्मी-पापा आने से पहले मैं निकल गया। लेकिन प्रिया अब पूरी तरह खुल चुकी थी।
अब वो खुद मौके निकालती। कभी दोपहर में जब घर खाली होता, कभी रात को जब सब सो जाते। हर बार चुदाई और ज्यादा जंगली होती जा रही थी।
एक दिन उसने कहा, “विक्रम… अगली बार किसी और को भी बुला सकते हो… मुझे देखना है कि दो लंड एक साथ कैसा लगता है। ”मैं मुस्कुराया। प्रिया अब सिर्फ चुदने वाली लड़की नहीं रह गई थी।
वो अपनी भूख खुद जगाने वाली हो गई थी। और ये सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ था…