शाम के साढ़े छह बज रहे थे। कॉलोनी के पार्क में बच्चे खेल रहे थे। अनन्या बेंच पर बैठी अपने फोन में कुछ देख रही थी।
तभी अमित की आवाज आई। “कैसी हो अनन्या? ”अनन्या ने नजर उठाई।
अमित मुस्कुरा रहा था। वही अमित जो पिछले बारह साल से उनके परिवार का करीबी दोस्त था। अनन्या के पति रोहित और अमित कॉलेज के समय से साथ थे।
शादी के बाद भी रिश्ता बना रहा। त्योहार, जन्मदिन, छोटी-मोटी मदद—सबमें अमित मौजूद रहता। अनन्या उसे हमेशा भाई जैसा मानती रही थी।
लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से कुछ अलग लग रहा था। अमित की नजरें थोड़ी देर ज्यादा टिकतीं। बातें करते समय वह करीब बैठता।
कभी-कभी उसकी आवाज में हल्की सी गर्माहट होती। “ठीक हूँ,” अनन्या ने जवाब दिया। “तुम इतनी जल्दी?
”“ऑफिस से छुट्टी मिल गई। रोहित घर पहुँचा क्या? ”“अभी नहीं।
देर से आएगा। ”अमित बेंच पर बैठ गया। थोड़ी दूरी पर।
लेकिन अनन्या को उसका इत्र महसूस हुआ। जाना-पहचाना, फिर भी आज अलग। “तुम थोड़ी उदास लग रही हो,” अमित ने कहा।
अनन्या ने मुस्कुराकर टाल दिया। “कुछ नहीं। बस थकान।
”अमित ने कुछ और पूछना चाहा, लेकिन बच्चे शोर मचाने लगे। बात अधूरी रह गई। रात को रोहित घर आया।
खाना खाते समय अनन्या चुप रही। रोहित टीवी देखने लग गया। अनन्या बर्तन धोते हुए सोच रही थी—अमित आज भी वैसा ही देख रहा था जैसे पिछले रविवार को पार्टी में।
जब उसने उसकी साड़ी की तारीफ की थी। “बहुत अच्छी लग रही हो आज। ” बात सामान्य थी, लेकिन आँखों में कुछ और था।
अगले दिन दोपहर में अमित अचानक घर आ गया। “रोहित का लैपटॉप चाहिए था। ऑफिस का काम।
”अनन्या अकेली थी। बेटा स्कूल में। उसने दरवाजा खोला।
अमित अंदर आया। लिविंग रूम में बैठकर लैपटॉप खोलने लगा। अनन्या चाय बनाने रसोई गई।
वापस आई तो अमित उसे देख रहा था। “चाय पी लो,” अनन्या ने कप बढ़ाया। अमित ने कप लिया।
उँगलियाँ अनन्या की उँगलियों से छू गईं। एक पल के लिए दोनों रुके। अनन्या ने हाथ खींच लिया।
दिल की धड़कन तेज हो गई। “तुम बदल गई हो,” अमित ने अचानक कहा। अनन्या चौंक गई।
“क्या मतलब? ”“पता नहीं। पहले इतनी… दूर नहीं लगती थीं।
”अनन्या ने हँसकर टाल दिया। “पागल हो गए हो क्या। ”लेकिन अमित की नजरें उसकी आँखों में थीं।
“मैं सच कह रहा हूँ। पिछले कुछ समय से तुम्हें देखकर अजीब लगता है। ”अनन्या का गला सूख गया।
उसने विषय बदलने की कोशिश की। “लैपटॉप मिल गया? ”अमित ने सिर हिलाया।
लेकिन उठा नहीं। “अनन्या… एक बात पूछूँ? ”“क्या?
”“तुम खुश हो न रोहित के साथ? ”सवाल सीधा था। अनन्या चुप रही।
सालों से कोई नहीं पूछता था। रोहित अच्छा पति था—जिम्मेदार, देखभाल करने वाला। लेकिन पिछले दो-तीन साल से बीच में दीवार सी आ गई थी।
बातें कम, छूना और भी कम। “हाँ… खुश हूँ,” अनन्या ने धीरे से कहा। अमित ने कुछ नहीं कहा।
बस देखता रहा। अनन्या की साँस तेज हो रही थी। कमरे में सन्नाटा था।
अमित ने अचानक हाथ बढ़ाकर अनन्या का हाथ पकड़ लिया। “मैं तुम्हें लंबे समय से… देख रहा हूँ। ”अनन्या ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन अमित ने कस लिया।
“मत कहो ऐसा। तुम परिवार के दोस्त हो। ”“इसीलिए तो इतने साल चुप रहा।
” अमित ने कहा। उसकी आवाज भारी थी। अनन्या खड़ी हो गई।
“जाओ अमित। रोहित आ जाएगा। ”अमित भी उठा।
एक कदम करीब आया। “मैं जा रहा हूँ। लेकिन तुम जान लो—मैं तुम्हें चाहता हूँ।
”अनन्या की आँखें फटी की फटी रह गईं। अमित ने लैपटॉप लिया और निकल गया। दरवाजा बंद होते ही अनन्या कुर्सी पर बैठ गई।
हाथ काँप रहे थे। शरीर में अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उस रात अनन्या सो नहीं पाई।
अमित की बातें बार-बार याद आ रही थीं। उसकी नजर, उसका स्पर्श। रोहित बगल में सोया था।
अनन्या ने उसकी तरफ देखा। जाना-पहचाना चेहरा। लेकिन मन कहीं और था।
अगले तीन दिन अनन्या ने अमित से दूरी बनाए रखी। फोन नहीं उठाया। घर आने पर बहाना बना दिया।
लेकिन मन शांत नहीं था। हर रात शरीर में बेचैनी होती। choot में हल्की सी गर्मी महसूस होती।
चौथे दिन गलतफहमी हो गई। रोहित ने अमित को फोन किया कि शाम को घर आ जाना, कुछ काम है। अमित आ गया।
रोहित अचानक ऑफिस की इमरजेंसी में निकल गया। घर में फिर अनन्या और अमित अकेले रह गए। अमित ने दरवाजे पर खड़े होकर कहा, “मैं चला जाऊँ?
”अनन्या ने सिर हिलाया। “नहीं… अंदर आ जाओ। ”अमित अंदर आया।
दोनों लिविंग रूम में खड़े रहे। हवा भारी लग रही थी। अमित ने धीरे से कहा, “मैंने जो कहा था… उसे भूल जाओ अगर तुम चाहो।
”अनन्या ने नजर उठाई। “भूल नहीं पा रही। ”अमित एक कदम और करीब आया।
“तो क्या सोच रही हो? ”अनन्या का गला भर आया। “मैं… डर रही हूँ।
”अमित ने उसका हाथ पकड़ा। इस बार अनन्या ने नहीं छुड़ाया। अमित ने उसे धीरे से अपनी तरफ खींचा।
अनन्या का सिर उसकी छाती से लगा। अमित के दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी। “सालों से देख रहा हूँ तुम्हें,” अमित ने फुसफुसाया।
“हर पार्टी में, हर मुलाकात में। तुम्हारी हँसी, तुम्हारा चलना, तुम्हारा शरीर… सब। ”अनन्या ने आँखें बंद कर लीं।
अमित का हाथ उसकी कमर पर था। धीरे-धीरे ऊपर सरक रहा था। ब्लाउज के पास पहुँचकर रुक गया।
अनन्या ने खुद उसका हाथ पकड़कर अपनी छाती पर रख दिया। अमित की साँस रुक गई। उसने धीरे से दबाया।
अनन्या की चूची उसके हाथ में पूरी आ गई। निप्पल सख्त हो चुका था। अमित ने दूसरा हाथ भी बढ़ाया।
दोनों चूचियों को जोर-जोर से मसलने लगा। अनन्या की कमर पीछे की ओर मुड़ गई। “आह… अमित…”अमित ने उसका चेहरा ऊपर उठाया और होठों पर होठ रख दिए।
चुंबन पहले धीमा था, फिर पागलों जैसा हो गया। जीभ गहराई तक चली गई। दाँत होठों को काट रहे थे।
अनन्या ने उसके बाल झपट लिए। शरीर एक-दूसरे से चिपक गया। अमित का सख्त लंड अनन्या की जाँघ से टकरा रहा था।
अमित ने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। चूचियाँ बाहर छलांग लगाकर आ गईं। उसने झुककर एक बड़े निप्पल को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
जीभ से गोल-गोल घुमाया, फिर दाँतों से हल्का काटा। अनन्या की कराह निकल गई। “और जोर से चूसो… काटो…” अमित ने दूसरी चूची भी मुँह में ली।
दोनों को बारी-बारी से चूसता, मसलता, निचोड़ता रहा। निप्पल लाल हो गए। अनन्या की चूचियों से दूध जैसी संवेदनशीलता फूट रही थी।
अमित का हाथ नीचे साड़ी के अंदर चला गया। जाँघों को सहलाते हुए सीधे पैंटी पर पहुँचा। पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी।
उसने उँगलियों से चुत को ऊपर से सहलाया। फिर पैंटी खींचकर नीचे कर दी। दो मोटी उँगलियाँ सीधी चुत के अंदर धँस गईं।
अनन्या चीख निकली। “आह… इतनी अंदर…” अमित ने उँगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। साथ में अंगूठे से क्लिटोरिस को रगड़ रहा था।
अनन्या की टाँगें काँपने लगीं। पानी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। “बिस्तर पर ले चल,” अनन्या ने खुद कहा।
आवाज में भूख साफ थी। दोनों बेडरूम में भागे। दरवाजा बंद करते ही कपड़े फर्श पर बिखर गए।
अनन्या पूरी नंगी बिस्तर पर लेट गई। जाँघें फैला दीं। चुत खुला हुआ, चमकता हुआ, थोड़ा सा खुला मुँह लिए।
अमित ने तुरंत झुककर अपना मुँह चुत पर रख दिया। जीभ की नोक से क्लिटोरिस को चाटा, फिर जोर से चूसा। अनन्या की कमर हवा में उठ गई।
अमित ने दोनों हाथों से उसकी जाँघें और फैला दीं और जीभ को चुत के अंदर जितना गहरा हो सके धकेल दिया। अंदर की दीवारों को चाटने लगा। अनन्या पागलों की तरह कराह रही थी।
“जीभ और अंदर… चूसो मुझे…” अमित ने दो उँगलियाँ भी साथ डाल दीं। उँगलियाँ और जीभ मिलकर चुत को फाड़ने वाली थीं। अनन्या का शरीर अकड़ गया।
वह जोर से काँपते हुए झड़ गई। पानी अमित के चेहरे पर छलक गया। अमित ने सब चाट लिया।
अमित ने अपना लंड निकाला। नसों से भरा, मोटा, लंबा, सिरे से पानी टपकता। अनन्या ने खुद हाथ बढ़ाकर पकड़ा और मुँह में ले लिया।
गले तक समेटने की कोशिश की। लार टपकाते हुए चूसने लगी। अमित उसके बाल पकड़कर धक्के लगाने लगा।
“पूरा ले… गले तक…” अनन्या की आँखों में आँसू आ गए लेकिन उसने रोका नहीं। फिर अमित ने उसे लिटाया। लंड का मोटा सिरा चुत के मुँह पर रखा और एक झटके में आधा अंदर धकेल दिया।
अनन्या चीख पड़ी। “आह… बहुत मोटा…” अमित ने रुके बिना पूरा अंदर कर दिया। अंडकोष चुत से टकरा गए।
फिर उसने पागलों की तरह धक्के लगाने शुरू कर दिए। बिस्तर जोर-जोर से चरमरा रहा था। हर धक्के के साथ अनन्या की चूचियाँ उछल रही थीं।
अमित ने दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर निचोड़ा और निप्पल को मोड़ा। अनन्या की कराहें कमरे में गूंज रही थीं। “तोड़ दो… और जोर से चोदो…”अमित ने उसकी टाँगें कंधों पर चढ़ा दीं।
लंड और गहराई तक जा रहा था। चुत की दीवारें लंड को जकड़ रही थीं। अनन्या दूसरी बार झड़ने लगी।
उसके चुत से पानी की धार छूट गई। अमित ने बाहर निकाला और तुरंत अनन्या को पलट दिया। घुटनों के बल कर दिया।
अब असली पागलपन शुरू हुआ। अमित ने अनन्या की गांड को दोनों हाथों से फैलाया। गुलाबी छेद साफ दिख रहा था।
उसने झुककर अपनी जीभ सीधे गांड के छेद पर रख दी। अनन्या सहम गई। “अमित… वहाँ…?
” लेकिन अमित ने जवाब में जीभ अंदर धकेल दी। गांड के छेद को चाटने लगा। जीभ की नोक को घुमा-घुमाकर अंदर डाल रहा था।
थूक लगा-लगाकर छेद को गीला कर रहा था। अनन्या की आवाज बदल गई। “आह… चाट… और अंदर चाट…” अमित ने दोनों गालों को और फैलाया और जीभ को जितना हो सके गहराई तक डालकर चाटने लगा।
थूक की आवाज आ रही थी। उसने उँगली भी डाल दी। एक, फिर दो।
गांड का छेद खुलने लगा। अमित ने उठकर लंड पर थूक लगाया। फिर मोटे सिरे को गांड के छेद पर रखा।
“अब ले मेरी गांड में,” उसने कहा। अनन्या ने सिर हिलाया। “डाल… धीरे…” अमित ने दबाव डाला।
सिरा अंदर घुस गया। अनन्या की चीख निकल गई। “आह… दर्द… लेकिन मत निकाल…” अमित ने धीरे-धीरे और अंदर धकेला।
आधा लंड गांड में समा गया। फिर पूरा। अंडकोष गांड से टकरा गए।
अनन्या के आँसू निकल आए लेकिन उसने गांड पीछे की ओर धकेल दी। “पूरा चोदो… गांड फाड़ दो…”अमित ने लगाम छोड़ दी। जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
हर धक्के के साथ गांड की चमड़ी लहराने लगी। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। अमित ने एक हाथ से अनन्या की चुत में उँगलियाँ डाल दीं और दूसरी हाथ से उसकी चूची निचोड़ने लगा।
तीनों जगह एक साथ। अनन्या पागल हो चुकी थी। “गांड में और जोर से… चुत भी चोदो… चूचियाँ तोड़ दो…” अमित ने गति इतनी तेज कर दी कि बिस्तर दीवार से टकराने लगा।
गांड का छेद लंड के इर्द-गिर्द सफेद झाग बनाने लगा। अनन्या तीसरी बार जोर से झड़ गई। उसके शरीर में ऐंठन दौड़ गई।
अमित ने भी रोकना बंद किया। लंड गांड की गहराई में धँसा रहा और उसने गर्म धाराएँ छोड़ दीं। इतना कि कुछ बाहर भी निकल आया और अनन्या की जाँघों पर बहने लगा।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। साँसें हाँफ रही थीं। अमित का लंड अभी भी आधा सख्त गांड में था।
उसने धीरे से निकाला। गांड का छेद खुला और लाल हो चुका था। अमित ने फिर झुककर उसे चाटा।
अपनी ही पानी को चाटते हुए। अनन्या काँप रही थी। “पछतावा?
” अमित ने पूछा। अनन्या ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। “नहीं… और चाहिए…”उस रात वे रुके नहीं।
अमित ने फिर से चुत में डाला, फिर गांड में। अनन्या कभी ऊपर बैठकर खुद हिप्स हिलाती, कभी दीवार से सटकर खड़ी रहती। चूचियाँ काटने के निशानों से भर गईं।
चुत और गांड दोनों सूज गए। कमरा सेक्स की गंध से भर गया। रोहित शाम को लौटा।
अनन्या ने नहा लिया था लेकिन शरीर की थकान और आँखों की चमक छुप नहीं पाई। रात को रोहित जब करीब आया तो अनन्या का शरीर सख्त हो गया। रोहित ने कुछ नहीं कहा।
अगले दिन अमित ने मैसेज किया। अनन्या ने दोपहर में बुला लिया। इस बार और जंगली।
अमित ने अनन्या को किचन की प्लेटफॉर्म पर लिटाया। टाँगें फैलाकर पहले चुत चाटा, फिर गांड। दोनों छेदों को बारी-बारी चाटता रहा।
फिर खड़े-खड़े गांड में लंड डाल दिया। अनन्या की चूचियाँ प्लेटफॉर्म पर रगड़ खा रही थीं। अमित ने उसके बाल पकड़कर पीछे की ओर खींचे और जोर-जोर से गांड चोदी।
अनन्या की चीखें दबी हुई थीं। “फाड़ दो… पूरी गांड फाड़ दो…”मुलाकातें रोज की हो गईं। हर बार गांड चाटना और गांड चोदना जरूरी हो गया।
अमित अनन्या की गांड का दीवाना हो चुका था। वह घंटों चाटता, उँगलियाँ डालता, फिर लंड से फाड़ता। अनन्या भी अब खुद गांड फैलाकर पेश करने लगी थी।
“आज गांड में ही करना… पहले अच्छी तरह चाट…”एक दिन रोहित के दोस्त ने अमित को अनन्या के घर से निकलते देखा। बात रोहित तक पहुँची। एक शाम रोहित जल्दी आ गया।
अमित अनन्या की गांड चाट रहा था। अनन्या घुटनों के बल थी, गांड फैलाए। रोहित ने दरवाजा खोला।
तीनों सन्न रह गए। रोहित ने सिर्फ इतना कहा, “बाहर निकलो। ”अमित कपड़े पहनकर चला गया।
अनन्या नंगी बिस्तर पर रोती रही। शरीर पर अमित के थूक और पानी के निशान अभी भी थे। अगले दिन अमित ने फोन पर कहा, “मैं तुम्हारी गांड के बिना नहीं रह सकता।
”अनन्या रोते हुए बोली, “सब खत्म हो जाएगा। ”फिर भी दो दिन बाद दोनों फिर मिले। इस बार अमित ने अनन्या को बाथरूम में लिया।
पानी की बौछार के नीचे पहले उसकी गांड को साबुन से साफ किया, फिर जोर-जोर से चाटा। जीभ छेद के अंदर तक घुमाई। फिर लंड डालकर खड़े-खड़े गांड चोदी।
पानी और चिकनाहट से धक्के और तेज हो गए। अनन्या की चूचियाँ शीशे पर दब रही थीं। अमित ने आखिर में गांड की गहराई में ही झड़ दिया।
परिणाम आने शुरू हो गए। कॉलोनी में बातें फैलने लगीं। रोहित का व्यवहार बदल गया।
अनन्या हर रात रोती, लेकिन शरीर अमित की जीभ और लंड को याद करता। चुत और गांड दोनों में बेचैनी रहती। एक रात अनन्या ने अमित से कहा, “आखिरी बार…”उस रात दोनों ने कोई सीमा नहीं रखी।
अमित ने घंटों अनन्या की गांड चाटी। जीभ, उँगलियाँ, फिर लंड। चुत में भी बारी-बारी।
अनन्या की आवाजें पूरे घर में गूंज रही थीं। जब अमित आखिरी बार गांड में झड़ा तो अनन्या ने कहा, “सब अंदर ही छोड़… निकालना मत। ”सुबह अनन्या आईने के सामने खड़ी थी।
गर्दन, चूचियाँ, जाँघें, गांड—सब पर निशान थे। गांड का छेद अभी भी थोड़ा खुला हुआ था। उसने कपड़े पहने और खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई।
सालों की जान-पहचान ने जो रूप लिया था, वह अब किसी भी गलतफहमी से कहीं आगे जा चुका था। आकर्षण ने शरीर की हर सीमा तोड़ दी थी। अब आगे क्या होगा—अनन्या नहीं जानती थी।
लेकिन एक बात तय थी। अमित की जीभ और लंड के बिना उसकी गांड और चुत अब शांत नहीं होने वाले थे।