बारिश की रात में आयशा की कुंवारी चूत

कहानी की झलक

कैसे हो दोस्तों,मैं अभि फिर से आपके सामने अपनी एक और गर्मागर्म, लस्ट भरी कहानी के साथ हाजिर हूं.अगर आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ी होगी तो मेरे परिचय की जरूरत

कैसे हो दोस्तों,मैं अभि फिर से आपके सामने अपनी एक और गर्मागर्म, लस्ट भरी कहानी के साथ हाजिर हूं.अगर आपने मेरी पिछली कहानी पढ़ी होगी तो मेरे परिचय की जरूरत नहीं.

नए दोस्तों के लिए बता दूं – मैं बिहार के छोटे से गांव का लड़का हूं. एकहरा शरीर, मोटा-लंबा काला लंड और वो भूख जो कभी शांत नहीं होती.

जिन औरतों ने इसका स्वाद लिया, वो आज भी मेरे नाम से भीग जाती हैं.तो चलिए शुरू करते हैं साल 2017 की इस लंबी, भावुक और बेहद कामुक कहानी…हमारे गांव के आसपास खेत और घना जंगल था.

गरीब घरों की लड़कियां और औरतें रोज लकड़ी चुनने और बकरियां चराने आती थीं. इन्हीं में से एक थी आयशा.आयशा 19 साल की थी, लेकिन चेहरे से 15-16 की लगती थी.

गोरा-मटियाला रंग, बड़ी-बड़ी कजरारी आंखें, पतली कमर और सबसे खास – एकदम गोल, मोटी, लहराती गांड.

उसकी चूचियां 32 इंच की, सख्त, ऊपर को उठी हुई और निप्पल हल्के भूरे रंग के थे.

वह पर्दानशीं थी, लेकिन काम के समय उसके कपड़े शरीर से चिपक जाते तो कोई भी मर्द पागल हो सकता था.वह रोज अपनी बकरियों को लेकर हमारे घर के पीछे वाले जंगल में आती.

मैं चूत का पिशाच तो था ही, पहले दिन से ही उसकी मोटी गांड पर नजर पड़ गई.

मैं उसके छोटे भाई-बहनों को टॉफी-बिस्कुट देने लगा.आयशा मुस्कुराकर कहती, “भाईजान, आपको बच्चे बहुत प्यारे लगते हैं ना?”मैं उसकी आंखों में देखकर मुस्कुराता, लेकिन नजरें उसकी गांड पर टिकी रहतीं.

“हां आयशा… बहुत प्यारे लगते हैं. खासकर वो जो थोड़े शरमाते हैं.”रोज उसे देखकर मूठ मारना मेरी आदत बन गई.

उसके गीले कपड़ों में छिपी चूचियां और गांड की कल्पना करके मैं रात-रात भर झड़ता.

कभी-कभी सोचता, “काश एक बार इस मोटी गांड में लंड डाल पाऊं…”फिर एक दिन मौका आ गया.मम्मी-पापा नानी के यहां गए हुए थे. आसमान में काले बादल छाए थे.

मैं बरसात में नहाने का इंतजार कर रहा था. तभी आयशा अपनी बकरियों को हांकती हुई आई.

आज वह अकेली थी.वह जंगल में झाड़ियों से बकरियों को बांधकर लकड़ी चुनने लगी.

मैं पीछे के दरवाजे से निकलकर जंगल की तरफ चला गया.आयशा झुक-झुककर लकड़ी चुन रही थी.

उसकी सलवार उसके मोटे नितंबों पर तनी हुई थी, गांड की गहरी दरार साफ दिख रही थी. मैंने लंड निकाल लिया और हिलाने लगा.

आंखें बंद करके कल्पना कर रहा था – उसकी गांड पकड़कर जोर-जोर से चोदने की, चूचियां दबाने की, चूत में लंड ठेलने की.तभी बूंदाबांदी शुरू हो गई.मैंने जल्दी लंड अंदर किया.

बारिश तेज हो गई. आयशा बकरियों को हांकती हुई भागी. उसके कपड़े भीगकर पूरी तरह शरीर से चिपक गए. चूचियां साफ उभरी हुई दिख रही थीं, निप्पल खड़े हो गए थे.

गांड हिल रही थी, पानी की धारें उसके नितंबों पर बह रही थीं.अचानक उसका पैर फिसला और वह कीचड़ में गिर पड़ी.मैं तुरंत उसके पास पहुंचा. “आयशा!

चोट तो नहीं लगी?”वह शरमाते हुए उठने की कोशिश कर रही थी. फिर से फिसली. मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और उठाया.

उसका गीला, नरम, गरम बदन मेरे सीने से पूरी तरह चिपक गया. उसकी सख्त चूचियां मेरे सीने को दबा रही थीं.

मेरा लंड तुरंत पत्थर हो गया और निक्कर फाड़ने को मचलने लगा.“क्या हुआ?

चोट लगी?” मैंने पूछा, उसकी कमर से हाथ हटाए बिना.आयशा शरमाकर बोली, “बारिश में पैर फिसल गया भाईजान…

बस कोहनी में थोड़ी चोट आई है.”“तुम तो कीचड़ से नहा गई हो. ऐसे घर कैसे जाओगी? अंदर आ जाओ, साफ कर लो.”“नहीं… कोई देख लेगा तो…”“घर में कोई नहीं है.

चलो.”वह चुपचाप मेरे पीछे आ गई.मैंने नल खोला, बाल्टी-मग दिया. वह हाथ-पैर धो रही थी. उसके भीगे कपड़े पूरी तरह शरीर से चिपके हुए थे.

गांड की दरार, चूत की हल्की उभान, चूचियों के निप्पल – सब कुछ दिख रहा था. मेरा लंड दर्द कर रहा था.थोड़ी देर बाद मैंने तौलिया दिया.

“बाल सुखा लो, सर्दी लग जाएगी.”वह बाल पोंछ रही थी. मैं पीछे से उसे घूर रहा था.“अब मैं जाऊं?” उसने पूछा.“भीगते हुए?

चाय पी लो.”“घर में कोई नहीं ना?”“नहीं. चलो अंदर दिखाता हूं.”मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और अंदर ले गया. घर घुमाया.

वह खुश हो रही थी, बार-बार पूछ रही थी, “इतना बड़ा घर… अंदर से कितना सुंदर है.”किचन में चाय बनाते वक्त वह पीछे घूमी तो मेरे सीने से टकरा गई.

हम दोनों एक-दूसरे को देखते रहे. मैंने उसकी कमर पकड़ ली और खींच लिया.“आयशा…” मैं फुसफुसाया और उसके माथे को चूम लिया.वह कांप उठी.

मैंने उसके होंठों को चूस लिया. वह पहले हिचकिचाई, फिर मेरे गले से लिपट गई.

उसकी सांसें तेज हो गईं.मैंने गैस बंद की और उसे गोद में उठाकर बेडरूम ले आया.पहली चुदाई – कुंवारी चूत का फाड़नामैंने उसे बेड पर लिटाया और उसके होंठ चूसने लगा.

जीभ अंदर डालकर उसके मुंह का मीठा रस पीने लगा. आयशा भी गर्म हो चुकी थी. उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी.मैंने उसकी कमीज उतारी.

घरेलू बनियान में उसकी सख्त चूचियां उभरी हुई थीं. “हाय अल्ला…” वह शरमाई.मैंने बनियान भी उतार दी. दो सख्त, गुलाबी-भूरे निप्पल वाले नंगे स्तन सामने थे.

मैंने एक चूची मुंह में भर ली और जोर-जोर से चूसने लगा. जीभ से निप्पल घुमाया, दांतों से हल्का काटा.

दूसरी चूची मुट्ठी में दबाते हुए निप्पल खींचा.आयशा तड़प उठी, “आह… भाईजान… धीरे… हाय अल्ला… मजा आ रहा है…”मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला.

घनी झांटों वाली कुंवारी चूत सामने थी, पहले से थोड़ी गीली. मैं उंगलियों से सहलाने लगा, क्लिटोरिस पर उंगली घुमाई.

वह कांप रही थी, कमर उठा रही थी.“आयशा, तुम बहुत गर्म हो… तुम्हारी चूत पहले से रस छोड़ रही है.”मैंने उंगली अंदर डाली. वह चीखी, “आह…

दर्द हो रहा है… लेकिन अच्छा भी लग रहा है…”धीरे-धीरे उंगली चला रहा था. उसकी चूत गीली होकर चमकने लगी.

मैंने लंड निकाला – मोटा, काला, नसों वाला, पूरी तरह खड़ा.आयशा डर गई, “नहीं… ये मत…

मेरी शादी की बात चल रही है…”“बस ऊपर-ऊपर कर लेते हैं…”वह हां में सिर हिलाने लगी. मैं लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा.

छिलका ऊपर-नीचे करते हुए गर्म लंड उसकी क्लिट पर दबा रहा था. वह पागल हो गई. खुद मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगी.“भाई… अब डाल दो…

मुझसे नहीं रुक रहा… चोद दो मुझे… प्लीज…”मैंने उसे चूमते हुए धीरे से दबाया. लंड का सुपारा अंदर गया. आयशा चीखी, “आह… फट गई…”मैं रुका नहीं.

एक जोरदार झटका दिया और पूरा मोटा लंड उसकी कुंवारी चूत में उतार दिया.“आआआह… मार डाला… फट गई मेरी चूत… निकालो…” वह रोने लगी, आंसू बह रहे थे.

उसकी चूत से खून निकल रहा था.मैं रुका, उसके आंसू चाटे, चूचियां चूसीं, होंठ चूसे. धीरे-धीरे हिलाने लगा. 5-6 मिनट बाद वह भी कमर हिलाने लगी.“अब जोर से…

चोदो मुझे… हां… और तेज… आपका लंड बहुत मोटा है… मेरी चूत फाड़ रहा है…

लेकिन मजा आ रहा है…”मैंने उसकी टांग कंधे पर रखी और जोर-जोर से चोदने लगा. कमरे में चप-चप, पच-पच की आवाज गूंज रही थी. आयशा चीख रही थी, “हां…

फाड़ दो… मेरी चूत अब आपकी है… और गहराई तक…”वह पहली बार झड़ गई. उसका पूरा बदन कांपा, चूत मेरे लंड को निचोड़ने लगी.

मैंने रुककर उसे चूमा.फिर मैंने उसे कुतिया बनाया और पीछे से घुसा. गांड पकड़कर तेजी से ठोका. उसकी मोटी गांड हर थ्रस्ट पर हिल रही थी.

मैंने गांड पर थप्पड़ मारे.“आयशा, तुम्हारी गांड बहुत प्यारी है… एक दिन इसमें भी डालूंगा.”वह दूसरी बार झड़ गई.

मैं भी झड़ गया – पूरा गर्म, गाढ़ा वीर्य उसकी चूत में भर दिया.दूसरी चुदाई – मुंह चोदना और गहराईहम थोड़ी देर लिपटे रहे.

मैं उसके शरीर को सहलाता रहा, चूचियां दबाता रहा. फिर मैंने उसे बाथरूम ले जाकर नहलाया.

नंगी अवस्था में उसके शरीर को साबुन लगाते हुए फिर से चूमने लगा.बाहर आकर चाय पीते हुए मैंने उसे फिर गोद में बिठा लिया.“आयशा, तुम बहुत स्वादिष्ट हो.”उसने शरमाकर कहा, “आपने तो मेरी जान ही ले ली…

अब मैं क्या करूंगी…”मैंने उसे फिर बेड पर लिटाया. इस बार मैं उसके मुंह में लंड देने लगा. “चूसो इसे…”वह पहले हिचकिचाई, फिर जीभ से छेद चाटने लगी.

मैंने धीरे से गले तक ठेला. वह गला-गला कर रही थी, लेकिन रुकी नहीं.

मैंने उसके मुंह को चोदा – धीरे-धीरे फिर तेजी से.फिर मैंने उसे उल्टा लिटाया और गांड चाटी. उंगली गांड में डाली.

वह फिर गर्म हो गई.“अब गांड भी मारोगे?” उसने पूछा, शरमाते हुए.“आज नहीं…

अगली बार पूरा मज़ा लेंगे.”मैंने उसे फिर चोदा – इस बार मिशनरी में, आंखों में आंखें डालकर. धीरे-धीरे, गहरे थ्रस्ट.

हर थ्रस्ट पर उसकी चूचियां उछल रही थीं. वह बार-बार झड़ रही थी, “भाईजान… मैं आपकी हो गई… चोदते रहो…

कभी मत छोड़ना…”तीसरी बार हम दोनों साथ झड़े.शाम ढलने तक हम तीन बार पूरी चुदाई कर चुके थे.

आयशा की चूत सूज गई थी, लेकिन वह मुस्कुरा रही थी.जाते वक्त वह बोली, “भाईजान… अब मैं आपकी हूं. जब भी बुलाओ…

आ जाऊंगी.”मैंने उसे 500 रुपये दिए, “अच्छी सी ब्रा-पैंटी खरीद लेना.”वह मुस्कुराई और चली गई.उसके बाद कई बार हमारी मुलाकातें हुईं – जंगल में, घर में, बारिश में.

आयशा मेरी गुप्त रखैल बन गई. उसकी कुंवारी चूत मेरे लंड की दीवानी हो गई.दोस्तों, ये थी आयशा की पहली बारिश वाली रात की पूरी कहानी.

बहुत लंबी, बहुत गर्म और बहुत यादगार.अगर पसंद आई तो कमेंट जरूर करना.

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