कानपुर से आया रजत सिर्फ़ चौबीस का था। पतला शरीर, पाँच फ़ीट छह इंच की कद-काठी, और चेहरे पर हमेशा थकान। दिल्ली में ज़ोमैटो का डिलीवरी बॉय बनकर रोज़ी-रोटी चल रही थी।
सुबह से रात तक स्कूटर पर घूमना, ऑर्डर लेना, ट्रैफ़िक से लड़ना, और महीने के अंत में जो मिलता वो मुश्किल से कमरे का किराया और खाना भर पाता। घर वालों को कानपुर में पैसे भेजने के बाद जेब में कुछ नहीं बचता। शरीर कमज़ोर था, लेकिन एक चीज़ थी जो उसे गर्व दिलाती—आठ इंच का मोटा, लंबा लंड।
नहाने के समय जब वो उसे हाथ में लेता तो सोचता, “काश कोई औरत इसे सच में चाहती। ” सना बाइस की थी। मुस्लिम परिवार, ऊपरी मध्यम वर्ग।
पति आमिर आईटी कंपनी में सीनियर डेवलपर था, पैसा अच्छा कमाता था। सना को हमेशा बुरक़ा पहनना पड़ता था। घर से बाहर निकलना मुश्किल, फ़ोन चेक करना, दोस्तों से मिलना—सब पर पाबंदी।
ससुराल में सास-ससुर की वजह से झगड़े हुए तो आमिर ने उसे दिल्ली बुला लिया। यहाँ फ्लैट में अकेली रहती। आमिर सुबह नौ बजे निकलता, कभी-कभी रात के बारह बजे लौटता।
काम का तनाव, मीटिंग्स, डेडलाइन—सना के शरीर और मन दोनों को भूखा छोड़ जाता। सना पाँच फ़ीट आठ इंच लंबी थी। गोरी, दूध जैसी त्वचा।
छोटे-छोटे चुचियाँ, लेकिन लंबे पतले निप्पल जो छूते ही सख्त हो जाते। बड़ी, गोल, मुलायम गाँड—दूधिया सफ़ेद। चेहरा इतना ख़ूबसूरत कि बुरक़े के पीछे भी चमकता।
रात को जब आमिर सो जाता या लेट आता, सना अपने कमरे में आईना देखकर नंगी खड़ी हो जाती। उंगलियाँ चूत पर फेरती, निप्पल को चुटकी भरती, और फुसफुसाती—“कोई तो मुझे अच्छे से चुदे… कोई जो मेरी गाँड को चाटे, मेरी चूत में लंड डाले और मुझे रोने-चिल्लाने पर मजबूर कर दे। ” रजत को पहला ऑर्डर सना के फ्लैट पर मिला।
शाम के साढ़े सात बजे। बारिश हो रही थी। वो हेलमेट उतारकर दरवाज़े पर खड़ा हुआ।
सना ने बुरक़े में दरवाज़ा खोला। आँखें काली, होंठ हल्के गुलाबी। रजत ने पैकेट दिया।
उंगलियाँ छू गईं। एक पल की बिजली। सना ने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद… बाहर बहुत बारिश है।
अंदर आ जाओ, तौलिया लो। ” रजत हिचकिचाया, फिर अंदर चला गया। सना ने रसोई से तौलिया लाया।
बुरक़ा थोड़ा ऊपर उठा था, कलाई दिख रही थी। रजत की नज़र वहाँ अटक गई। सना ने देखा।
दोनों चुप। फिर सना ने धीरे से कहा, “तुम कानपुर से हो न? आवाज़ से लग रहा है।
” रजत ने हाँ कहा। बात बढ़ी। चाय पी।
सना ने बताया कि पति लेट आता है, वो अकेली रहती है। रजत ने अपनी ज़िंदगी की तकलीफ़ें बताईं। जब वो जाने लगा तो सना ने हाथ पकड़ लिया।
“कल भी आना… कोई बहाना बनाकर। ” अगले दिन रजत फिर आया। इस बार ऑर्डर छोटी सी मिठाई का था।
सना ने बुरक़ा उतार रखा था। सलवार-कमीज़ में। बाल खुले।
रजत की साँस अटक गई। सना ने दरवाज़ा बंद किया। दोनों सोफ़े पर बैठे।
बातें हुईं—सना की आज़ादी की कमी, आमिर की व्यस्तता, रजत की ग़रीबी। फिर सना ने रजत का हाथ अपने घुटने पर रखा। “मुझे छू… कोई नहीं छूता।
” रजत का हाथ काँपा। उसने सना की जाँघ सहलाई। सना ने आँखें बंद कर लीं।
रजत का हाथ ऊपर गया, सलवार के अंदर। चूत पर हथेली रखी। गीली थी।
सना कराह उठी। “और अंदर… उंगलियाँ डाल। ” रजत ने दो उंगलियाँ चूत में घुसा दीं।
सना की कमर उठ गई। “आह… रजत… ऐसे ही… मुझे चुदने दो। ” उस दिन सिर्फ़ उंगलियाँ चलीं।
सना झड़ गई। रजत का लंड पैंट में तना हुआ था। सना ने उसे बाहर निकाला।
आठ इंच का मोटा लंड देखकर उसकी आँखें फैल गईं। “इतना बड़ा… आमिर का तो आधा भी नहीं। ” उसने लंड को हाथ में लिया, मुँह में डाल लिया।
चूसने लगी। जीभ से चाटने लगी। रजत की कमर हिलने लगी।
“सना… मैं झड़ जाऊँगा। ” सना ने मुँह हटाया। “नहीं… आज नहीं।
कल आना। मैं पूरी तरह तैयार रहूँगी। ” तीसरे दिन बारिश और तेज़ थी।
रजत स्कूटर छोड़कर टैक्सी से आया। सना ने बुरक़ा भी नहीं पहना था। सिर्फ़ एक पतली साड़ी।
बिना ब्लाउज़। निप्पल साड़ी के पार साफ़ दिख रहे थे। दरवाज़ा बंद होते ही सना ने रजत को गले लगा लिया।
चुंबन गहरा, जीभ से जीभ। रजत ने साड़ी खींची। छोटे चुचियाँ बाहर आ गईं।
लंबे पतले निप्पल मुँह में लिए, चूसे, दाँतों से काटे। सना चिल्लाई, “हाँ… और ज़ोर से… मेरे निप्पल काटो। ” रजत ने सना को बिस्तर पर लिटाया।
साड़ी पूरी उतार दी। नंगी सना—दूधिया त्वचा, बड़ी गोल गाँड, छोटी चुचियाँ, और मुँडी हुई चूत जिसमें से पानी रिस रहा था। रजत ने घुटनों के बल बैठकर चूत चाटना शुरू किया।
जीभ अंदर-बाहर, चोदने जैसी। सना की टाँगें काँप रही थीं। “रजत… मेरी चूत खा जा… चाट… और अंदर…” रजत ने दो उंगलियाँ डालकर चूत को फैलाया, फिर जीभ अंदर घुसा दी।
सना चीख पड़ी। पहला झड़ बहुत तेज़ आया। पानी रजत के मुँह पर छलक गया।
फिर सना ने रजत को लिटाया। लंड मुँह में लिया। गहरे तक चूसा।
गला भरा। आँखों से आँसू आ गए, लेकिन वो रुकी नहीं। “तेरा लंड इतना स्वादिष्ट है… मैं इसे हमेशा चूसना चाहती हूँ।
” रजत ने बाल पकड़कर उसका मुँह लंड पर ठोका। सना गैगिंग कर रही थी, लेकिन आँखों में मज़ा था। फिर रजत ने सना को घुटनों के बल किया।
गाँड ऊपर। बड़ी, मुलायम, दूधिया सफ़ेद। रजत ने दोनों गाल फैलाए।
गांड का छेद दिखाई दिया। उसने जीभ वहाँ घुमाई। सना सहम गई।
“नहीं… वहाँ मत… अह्ह… मत रोक… चाट। ” रजत ने गांड चाटी, थूक लगाया, फिर लंड चूत में धंसा दिया। एक झटके में पूरा आठ इंच अंदर।
सना चिल्लाई। “आह्ह्ह… मेरी चूत फट गई… इतना मोटा… चल… जोर से चोद। ” रजत ने कमर मारी।
थपथप-थपथप आवाज़। सना की गाँड हिल रही थी। चुचियाँ बिस्तर पर रगड़ खा रही थीं।
रजत ने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “तेरी चूत कितनी टाइट है सना… जैसे कुँवारी। ” सना रोते हुए बोली, “चोद मुझे… मेरी जिंदगी में पहली बार कोई मुझे इतना जोर से चोद रहा है… आमिर तो बस जल्दी निपटा देता है… तू मुझे तोड़ दे।
” रजत ने गति बढ़ाई। लंड पूरा निकलता, फिर पूरा धँसता। सना की चूत से झाग बनने लगा।
दोनों पसीने से भीग गए। रजत ने सना को पलट दिया। मिशनरी।
आँखों में आँखें। सना के आँसू बह रहे थे। “मुझे प्यार कर… सिर्फ़ चोद मत… मुझे महसूस करा कि मैं औरत हूँ।
” रजत ने धीरे किया। चुंबन लिए। निप्पल चूसे।
फिर धीरे-धीरे जोर बढ़ाया। सना की टाँगें उसकी कमर पर लिपट गईं। “अंदर झड़… मेरे अंदर…” रजत ने लंड गहराई तक धँसाकर झड़ दिया।
गर्म वीर्य की धारें चूत में फूट पड़ीं। सना भी साथ में झड़ गई। दोनों काँपते हुए लेटे रहे।
उस रात रजत रुका नहीं। सना ने उसे स्नान कराया। फिर से चूसा।
फिर से चोदा। इस बार गांड में। पहले उंगलियाँ, फिर लंड।
सना दर्द से चिल्लाई, लेकिन रुकने नहीं दी। “मेरी गांड भी तेरी हो गई… चोद… फाड़ दे। ” सुबह तक दोनों थक चुके थे।
रजत गया तो सना ने मेसेज किया—“कल फिर आ… मैं तेरी रंडी बन गई हूँ। ” अगले हफ़्ते हर दिन मिलना शुरू हो गया। कभी दोपहर, कभी रात।
आमिर जब घर होता तो सना बुरक़े में रजत को बाहर मिलती, कार में चूत चुसवाती। एक दिन आमिर घर पर था। सना ने रजत को बालकनी में बुलाया।
बुरक़े के अंदर नंगी। रजत ने बुरक़ा ऊपर उठाया, पीछे से चोदा। अंदर आमिर टीवी देख रहा था।
सना मुँह दबाए कराह रही थी। “जोर से… लेकिन आवाज़ मत निकालने दे…” रजत ने मुँह दबाकर चोदा। झड़ते समय सना के आँसू बह निकले—मज़े के और पाप के।
एक रात सना ने रजत से कहा, “मुझे ले चल… कहीं दूर। एक रात पूरी। ” रजत ने सस्ते होटल में कमरा लिया।
सना बुरक़ा पहनकर आई, अंदर जाकर पूरी नंगी हो गई। पूरी रात चोदाई हुई। पहले चूत, फिर गांड, फिर दोनों साथ।
सना ने रजत का लंड चूसते हुए कहा, “मैं तेरी बीवी बनना चाहती हूँ… लेकिन नहीं बन सकती। तो कम से कम तेरी रंडी तो बनूँ। ” रजत ने उसे गोद में बिठाकर ऊपर से चोदा।
सना की गाँड उसके हाथों में थी। “तेरी ये दूधिया गांड… मैं रोज़ चाटना चाहता हूँ। ” सना झूम रही थी।
“चाट… चोद… मुझे अपना बना ले। ” महिनों बीत गए। रजत की कमाई बढ़ी क्योंकि सना कभी-कभी टिप के नाम पर पैसे देती।
लेकिन भावनाएँ गहरी हो गईं। एक दिन सना रोते हुए आई। “आमिर को शक हो गया है।
वो पूछ रहा है बार-बार कि मैं दिन में क्या करती हूँ। ” रजत ने उसे गले लगाया। “मैं तुझे नहीं छोड़ूँगा।
” उस रात सेक्स और भी जंगली हुआ। सना ने रजत से कहा, “आज मेरी चूत में, गांड में, मुँह में—सब जगह झड़। मुझे याद रहे।
” रजत ने वैसा ही किया। सुबह सना के शरीर पर वीर्य के निशान थे। उसने उन्हें पोंछा नहीं।
“ये तेरे निशान हैं… मेरे पति के नहीं। ” कहानी यहीं नहीं रुकी। एक दिन आमिर अचानक घर आ गया।
रजत अंदर था। सना ने जल्दी से रजत को बेडरूम के अलमारी में छिपाया। आमिर ने सना को चूमने की कोशिश की।
सना ठंडी पड़ गई। आमिर सो गया। रात को सना ने अलमारी खोली।
रजत बाहर आया। दोनों ने चुपचाप, आमिर के सोते हुए कमरे के बगल में, फर्श पर चोदाई की। सना मुँह दबाए कराह रही थी।
रजत ने फुसफुसाकर कहा, “तेरी चूत इतनी गीली है… तेरे पति के सामने। ” सना ने जवाब दिया, “क्योंकि तू मुझे चाहता है… वो सिर्फ़ इस्तेमाल करता है। ” समय के साथ रजत और सना का रिश्ता सिर्फ़ शरीर का नहीं रह गया।
भावनाएँ उलझ गईं। सना कभी-कभी कहती, “काश मैं आज़ाद होती… काश तू अमीर होता… हम भाग जाते। ” रजत जवाब देता, “मैं ग़रीब हूँ, लेकिन तेरी चूत, तेरी गांड, तेरा दिल—सब मेरा है।
” फिर दोनों फिर से लिपट जाते। लंड चूत में, उंगलियाँ गांड में, जीभ निप्पल पर। घंटों चलती चोदाई।
कभी धीमी और भावुक, कभी जानवरों जैसी। एक बार सना ने रजत से विनती की, “मेरी गांड को लाल कर दे। इतनी जोर से चोद कि बैठ न सकूँ।
” रजत ने वैसा ही किया। थप्पड़ मारे, लंड धँसाया, सना को रोने पर मजबूर किया। बाद में दोनों नहाए।
सना ने रजत का लंड साबुन से धोया, फिर मुँह में लिया। “ये लंड मेरी जिंदगी है अब। ” उस रात सना की आँखों में एक अजीब भूख थी।
आमिर ट्रिप पर था, पूरा फ्लैट उनका था। सना नंगी बिस्तर पर लेटी थी, बड़ी दूधिया गाँड हवा में उठी हुई। उसने रजत की ओर देखा और धीरे से, लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा— “रजत… आज मेरी गाँड को लाल कर दे।
इतनी ज़ोर से चोद कि मैं बैठ ही न सकूँ। कल चल भी न पाऊँ। मेरी गाँड फाड़ दे… जितना दर्द हो, उतना मज़ा लेना।
” रजत का आठ इंच का मोटा लंड तुरंत तन गया। उसने सना को घुटनों के बल कर दिया। दोनों हाथों से उसकी बड़ी, मुलायम, सफ़ेद गाँड के गाल फैलाए।
बीच में गुलाबी, सिकुड़ा हुआ गांड का छेद दिख रहा था। रजत ने पहले थूक लगाया, फिर जीभ निकालकर गाँड पर लपका दी। सना का शरीर काँप उठा।
“आह्ह… चाट… मेरी गाँड चाट… जीभ अंदर डाल…” रजत ने जीभ को गांड के छेद पर घुमाया, फिर जोर से अंदर धकेल दिया। चाटने की आवाज़ गीली-गीली निकल रही थी। उसने दोनों गाल और ज़ोर से फैलाए, नाक गाँड में धँसा दी और जीभ को अंदर-बाहर करने लगा जैसे चूत चोद रहा हो।
सना की कमर हिलने लगी। छोटी चुचियाँ बिस्तर पर रगड़ खा रही थीं, लंबे पतले निप्पल सख्त हो चुके थे। “और अंदर… मेरी गाँड को गीला कर दे… फिर लंड डालना…” रजत ने काफी देर तक गाँड चाटी।
थूक की लार गांड से नीचे चूत तक बह रही थी। फिर उसने सना को मुँह के बल लिटाया, खुद उसके सिर के पास आकर खड़ा हो गया। लंड सना के होठों पर पटका।
“पहले मेरे लंड और टट्टे चूस। गला भर जाए तब तक। ” सना ने मुँह खोल दिया।
रजत ने पूरा लंड एक झटके में उसके गले तक धँसा दिया। सना की आँखें पानी से भर गईं। गैगिंग की आवाज़ आने लगी—घर्र-घर्र।
रजत ने बाल पकड़कर उसका सिर लंड पर ठोकना शुरू किया। फिर लंड निकाला और दोनों टट्टे सना के मुँह में ठूंस दिए। सना टट्टे चूस रही थी, जीभ से चाट रही थी, कभी एक को मुँह में लेती तो कभी दोनों को।
लार उसके ठोड़ी से नीचे टपक रही थी। रजत ने फिर लंड गले में धँसाया। सना का गला फूल गया, लेकिन उसने रुकने की कोशिश नहीं की।
आँखों से आँसू बह रहे थे, नाक से सिसकी निकल रही थी। जब रजत का लंड पूरी तरह लार से नहा चुका, तब उसने सना को फिर घुटनों के बल किया। गाँड ऊपर।
एक थप्पड़ मारा—छपाक! सना की गाँड पर लाल निशान पड़ गया। दूसरा थप्पड़।
तीसरा। सना चिल्लाई, लेकिन गाँड और ऊपर उठा दी। “और मार… मेरी गाँड लाल कर दे…” रजत ने लंड का मोटा सिरा गांड के छेद पर रखा।
धीरे से धक्का दिया। सिरा अंदर घुसा। सना की साँस अटक गई।
“आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन मत रुक… और अंदर…” रजत ने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखे और एक लंबा, जोरदार धक्का मारा। पूरा आठ इंच गांड में धँस गया। सना की चीख निकल गई।
आँसू बहने लगे। “फाट गई… मेरी गाँड फट गई… रजत… इतना मोटा… आह्ह्ह…” रजत रुका नहीं। उसने कमर पीछे खींची और फिर जोर से धँसाई।
थपथप-थपथप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँजने लगी। हर धक्के के साथ सना की बड़ी गाँड हिल रही थी। रजत थप्पड़ मारता जा रहा था—बाएँ गाल पर, दाएँ गाल पर।
गाँड लाल हो चली थी। “तेरी ये दूधिया गाँड अब लाल हो रही है… देख… कितनी सुंदर लग रही है मेरे लंड से भरी हुई। ” सना रो रही थी, लेकिन कमर पीछे धकेल रही थी।
“जोर से… और जोर से चोद… मुझे बैठने लायक मत छोड़… मेरी गाँड तोड़ दे…” रजत ने गति बढ़ा दी। अब पूरी ताकत से चोद रहा था। लंड पूरा निकलता, फिर एक झटके में पूरा अंदर चला जाता।
गांड का छेद लंड के इर्द-गिर्द सिकुड़-फैल रहा था। सना की चूत से पानी की धार बह रही थी, बिना छुए ही। छोटी चुचियाँ बिस्तर पर रगड़ खाकर लाल हो गई थीं।
लंबे निप्पल इतने सख्त थे कि दर्द हो रहा था। रजत ने सना के बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। कमर और तेज़ चलाई।
“बोल… किसकी गाँड चुद रही है? ” “तेरी… तेरी गाँड… रजत की रंडी की गाँड… आह्ह्ह… और जोर से…” रजत ने एक हाथ आगे बढ़ाकर सना की चूत में दो उंगलियाँ डाल दीं। चूत और गांड दोनों एक साथ चुद रहे थे।
सना पागल हो गई। शरीर काँप रहा था। एक जोरदार झड़ आया।
चूत से पानी छलक गया। गांड और टाइट हो गई। रजत की साँस फूलने लगी।
“मैं अंदर झड़ने वाला हूँ… तेरी गाँड में…” “झड़… अंदर ही झड़… मेरी गाँड भर दे अपने वीर्य से…” रजत ने अंतिम कुछ धक्के पूरे जोर से मारे। लंड गांड की गहराई तक धँसा और गर्म, गाढ़ी वीर्य की धारें फूट पड़ीं। सना ने महसूस किया कि उसके अंदर कुछ गर्म भर रहा है।
रजत के शरीर की हर नस तन गई। वो कुछ देर वैसे ही अंदर रहा, फिर धीरे से लंड निकाला। गांड का छेद खुला रह गया था।
सफ़ेद वीर्य बाहर रिस रहा था। गाँड पूरी तरह लाल और सूजी हुई थी। सना बिस्तर पर ढेर हो गई।
उठने की कोशिश की तो दर्द से चीख निकली। “आह्ह… बैठ नहीं सकती… चल भी नहीं पाऊँगी शायद… तूने सच में मेरी गाँड फाड़ दी…” रजत उसे गोद में उठाकर बाथरूम ले गया। शॉवर चालू किया।
गर्म पानी दोनों पर गिरने लगा। सना दीवार का सहारा लेकर खड़ी थी। रजत ने साबुन लिया और अपने लंड को अच्छी तरह धोया—जो अभी भी आधा तना हुआ था और गांड की गंदगी से सना हुआ था।
फिर सना के हाथ में साबुन थमा दिया। सना ने घुटनों के बल बैठने की कोशिश की, दर्द से चेहरा सिकुड़ गया, लेकिन फिर भी बैठ गई। साबुन से रजत का लंड धीरे-धीरे साफ़ करने लगी।
झाग बनाते हुए ऊपर-नीचे हाथ फेर रही थी। फिर पानी से धोया। लंड चमकने लगा।
उसने मुँह खोला और लंड को अंदर ले लिया। धीरे-धीरे चूसने लगी। जीभ से निचले हिस्से को चाटा, फिर टट्टे मुँह में लिए और चूसे।
आँखें ऊपर रजत की ओर थीं। लंड मुँह से निकालकर बोली— “ये लंड… मेरी ज़िंदगी है अब। जो दर्द तूने दी है, वो भी प्यार है।
मेरी गाँड तेरी है… मेरी चूत तेरी है… मैं तेरी रंडी हूँ। ” फिर से लंड मुँह में ले लिया। इस बार गहरे तक।
गैगिंग की आवाज़ फिर आने लगी, लेकिन सना रुकी नहीं। रजत के हाथ उसके बालों में थे। शॉवर का पानी दोनों पर गिर रहा था।
सना की लाल गाँड पानी से चमक रही थी। रजत ने फिर से सना को खड़ा किया, दीवार के सहारे किया और एक बार फिर से गांड में लंड डाल दिया—इस बार धीरे, लेकिन गहरा। सना कराह उठी, लेकिन पीछे हटने की बजाय और सट गई।
“चल… एक बार और… जब तक मैं बेहोश न हो जाऊँ…” और रजत ने फिर से चोदना शुरू कर दिया। गाँड में। जोर से।
जब तक सना की टाँगें काँपने न लगें और वो दीवार का सहारा लेकर भी खड़ी न रह सके। रजत ने सना को दीवार से लगाकर फिर से गांड में लंड डाल दिया। इस बार और गहरा।
सना की टाँगें काँप रही थीं, लेकिन वो पीछे नहीं हटी। हर धक्के के साथ उसकी लाल गांड हिल रही थी। रजत के हाथ उसकी कमर पर थे, लंड पूरा अंदर-बाहर हो रहा था।
“आह्ह्ह… रजत… अब और बर्दाश्त नहीं… बेहोश हो जाऊँगी…”रजत ने अंतिम जोरदार धक्के मारे और गांड की गहराई में ही झड़ गया। गर्म वीर्य की धारें फिर से उसकी गांड में फूट पड़ीं। सना की टाँगें ढीली पड़ गईं।
रजत ने उसे संभालते हुए गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। सना की गांड पूरी तरह लाल, सूजी और वीर्य से भरी हुई थी। वो कराहते हुए बोली, “तूने सच में मुझे तोड़ दिया… अब कई दिनों तक ठीक से बैठ भी नहीं पाऊँगी।
”रजत उसके पास लेट गया। सना ने उसका लंड हाथ में लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। दोनों चुपचाप लेटे रहे।
बारिश बाहर रुक चुकी थी। कमरे में सिर्फ उनकी साँसें चल रही थीं। सुबह होते-होते सना ने रजत का सिर अपने सीने से लगाया और बोली, “मैं तेरी रंडी बनकर रहूँगी… जब तक आमिर हमें अलग न कर दे।
लेकिन आज के बाद मेरी गांड, मेरी चूत, मेरा शरीर—सब तेरा है। ”रजत ने उसके माथे पर चुंबन लिया। “मैं ग़रीब हूँ सना… लेकिन जब तक तू चाहेगी, मैं आता रहूँगा।
”उसके बाद भी दोनों मिलते रहे। कभी फ्लैट में, कभी सस्ते होटल में, कभी कार में। आमिर को कभी पूरा सच नहीं पता चला।
सना की जिंदगी में पहली बार किसी ने उसे सिर्फ़ इस्तेमाल नहीं किया था—उसने उसे चाहा था, चोदा था, और उसके दर्द को भी प्यार कहा था। रजत की ज़ोमैटो की डिलीवरी जारी रही, लेकिन अब हर रात सना के मेसेज का इंतज़ार रहता—“आज आ… मेरी गांड फिर से लाल कर दे। ”और रजत जाता।
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