गैर मर्द से भाभी की गरम बूर की चुदाई – Hindi Sex Story

रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे सुनीता भाभी ने राजू से ठुकवा कर चुदाई नहीं करवाई थी। उसका पति रमेश भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने राजू से बात करने लिए दुकानदार को फोन लगवाकर राजू को बुलाया। (यह घटना उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में हुई।

)सुनीता भाभी- हैलो … राजू को बुलाएंगे क्या एक बार? उधर से आवाज आई- आप कौन बोल रही हैं? सुनीता भाभी- बोल देना कि सुनीता का फोन है।

दुकानदार ने राजू को बुलाने के लिए एक लड़के को भेजा। लड़के ने कहा- राजू सेठ, किसी सुनीता का फोन है आपके लिए। राजू ने जो काम था, वो बाजू मे रख कर तुरंत जाकर फोन लिया- हैलो भाभी, बोलो?

सुनीता भाभी- राजू कहां पर हो तुम, मेरी याद आती है या नहीं? राजू- ओह जानेमन, तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ मैं। बिस्तर पर जब भी जाता हूं तुम्हारे बदन की वो याद और महक लेकर ही सोता हूं, तुम ही हो जो मेरे सपनों में आकर हमेशा वो नॉटी वाली तकलीफ दे कर मेरी नींद हराम कर देती हो।

सुनीता भाभी- सच्ची राजू, मेरे नॉटी राजू… गुन्डाराज … मैं भी तुम्हें और तुम्हारी गर्माहट को मिस जो कर रही हूं। राजू- ओह भाभी, तुम भी ना… आज रात तुम्हारे घर पर आता हूं मैं। लेकिन भाभी तेरा पति भी तो घर पर है।

रात को भी तू बाहर नहीं निकल पाती है। सुनीता भाभी- राजू, मेरे पास एक आइडिया है। आज ये शराब पीने के मूड में है।

तुम ऐसा करना कि रात के ग्यारह बजे तक आना। मैं रात को दरवाजा खुला ही रखूंगी। तुम चुपके से मेरे घर में अंदर आकर बिजली का मेन स्विच बंद कर देना।

मैं लाइट जाने का बहाना करके तुम्हारे पास आ जाऊंगी और तुम्हारी बांहों में खुद को सौंप दूंगी। राजू- सच में भाभी, तुम्हारे दिमाग को तो मानना पड़ेगा। क्या दिमाग लगाती हो तुम मेरी चुदक्कड़ भाभी।

मुझे भी भाभी की बूर का पानी पीने की प्यास बहुत दिनों से सता रही थी। आज रात को मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा मेरी सेक्सी भाभी। फोन को रखने के बाद राजू ने दुकानदार को देखा।

दुकानदार बोला- क्या माल पटा कर रखी हुई है तूने राजू। राजू- हां यार, क्या बताऊं, मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों को पटा कर चोदा हुआ है लेकिन यह जो सर्विस देती है वो कोई और नहीं देती। साली बिना कॉन्डम के ही मेरे लंड से चुदवा लेती है।

कई बार तो मुझे डर भी लगता है कि कहीं कुछ हो न जाये लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि अभी तक कुछ नहीं हुआ है। दुकानदार- हां राजू सेठ, लेकिन एक बात का ध्यान रखना। इसके पति से बच कर रहना।

वो पॉलिटिक्स वाला आदमी है। राजू- हां, ये बात तो है। चलो ठीक है, मैं जा रहा हूं क्योंकि रात को मुझे निकलना है।

रात के 11 बजे राजू सुनीता भाभी के घर पर पहुंच गया और देखा कि सुनीता भाभी एक सेक्सी सा गाउन पहने हुए खड़ी हुई थी। भाभी ने राजू सेठ को अपने घर के पास आते हुए देख लिया था। उसने अपने पति को बोला कि अब बंद भी करो।

उसका पति दारू पीने में लगा हुआ था। सुनीता का इशारा राजू की तरफ था। बंद तो उसको अपने घर की बिजली करवानी थी।

भाभी ने राजू को आंख मार दी। राजू ने बिजली बंद कर दी और भाभी ने राजू को दूसरे रूम में जाने के लिए चुपके से बोल दिया। लाइट बंद होते ही रमेश की दारू में भंग पड़ गया।

वो उठ कर अपने बेड पर चला गया। पांच मिनट के अंदर ही रमेश के खर्राटों की आवाज आना शुरू हो गई। राजू भी ताक में था कि कब भाभी का पति रमेश सोयेगा और वो अपना काम शुरू करेगा।

जैसे ही राजू को पता चला कि रमेश सो चुका है तो पीछे से आकर उसने भाभी को अपनी बांहों में लपक लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा। भाभी भी राजू की बांहों में आते ही चुदासी हो गई। भाभी की गांड को छूते ही राजू का मोटा लंड तनना शुरू हो गया और भाभी की मोटी गांड के बीच में अपनी जगह तलाशने लगा।

राजू ने अपने तने हुए लंड को भाभी की गांड की दरार के बीच में घुसा दिया। कपड़ों के ऊपर से ही जब राजू का लंड भाभी की गांड पर लगा तो भाभी मचल सी गई। उसने पलट कर राजू के होंठों को चूसना शुरू कर दिया।

राजू ने भाभी की कमर पर अपनी बांहों का घेरा बना दिया और उसको अपने आगोश में जकड़ लिया। उसके बाद उसने भाभी को फिर से पलटा और अपना खड़ा हुआ लंड भाभी की गांड में घुसाने लगा और आगे की तरफ हाथ ले जाकर भाभी के मोटे चूचों को दबाने लगा। भाभी के मुंह से सिसकारी बाहर आना चाहती थी लेकिन साथ में ही पति सो रहा था।

इसलिए भाभी बड़ी मुश्किल से खुद को रोक कर रखे हुए थी। राजू जोर से भाभी के चूचों को दबा रहा था। उसका लंड अपने पूरे आकार में आ गया था।

जब भाभी से रहा न गया तो भाभी ने पीछे हाथ ले जाकर राजू के लंड को उसकी पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी। भाभी के हाथ में लंड आते ही राजू की हवस और ज्यादा भड़क गई और वो भाभी को बुरी तरह से काटने लगा। भाभी ने कहा- चलो अंदर चलते हैं।

ये शराबी तो अभी नहीं उठने वाला। बहुत दिनों से तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही हूं। राजू ने भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और फिर कमरे में अंदर ले गया।

लेकिन चुदाई की जल्दबाजी में वो लोग कमरे को अंदर से लॉक करना भूल गये। लाइट भी नहीं थी इसलिए सोचा होगा कि वैसे भी अंधेरे में क्या कुछ पता लगने वाला है। बेडरूम का दरवाजा बंद किये बिना ही वो चूमा-चाटी में लग गये।

अंदर जाते ही भाभी ने राजू की शर्ट और पैंट उतरवा दी और फिर सोफे पर उसको बिठा दिया। राजू का लंड उसके अंडरवियर में तना हुआ था। राजू ने अपना अंडरवियर भी उतार दिया और वो सोफे पर बैठा हुआ नंगा हो गया।

उसका लंड उसकी जांघों के बीच में ऐसे तना हुआ था जैसे बिल से निकल कर सांप फन उठाये खड़ा हो। फिर भाभी ने अपने कपड़े उतार लिये और नंगी होकर राजू की गोद में आकर बैठ गई। राजू का तना हुआ लौड़ा भाभी की गांड के नीचे दब गया।

गोद में बैठी हुई भाभी के चूचों को मुंह लगा कर ऐसे पीने लगा जैसे बहुत दिनों से किसी को पानी नसीब नहीं हुआ हो। लेकिन यहां पर दूध निकालने की कोशिश की जा रही थी। वो जोर से भाभी के चूचों को पीने में लगा हुआ था भाभी के मुंह से सीत्कार फूट रहे थे।

राजू का लंड भाभी की गांड के नीचे उसकी बूर में जाने के तड़प रहा था। इधर भाभी की गांड भी राजू के लंड पर उछलने के लिए बेताब हुई जा रही थी। फिर राजू ही बोल पड़ा- बस भाभी बस … अब और क्यूं तड़पा रही हो।

इस पर उछलो ना … भाभी बोली- आह्ह राजू … तुम मेरे मन की बात कैसे जान लेते हो। मैं तो खुद तुमसे कहने वाली थी कि अब अंदर डाल दो। मेरी बूर ने पानी निकाल कर पूरी तैयारी कर ली है।

फिर भाभी ने अपनी टांगों को फैलाते हुए राजू के तने हुए लौड़े पर अपनी बूर को सेट किया उसके तगड़े लंड को अपनी बूर में लेते हुए बैठती चली गई। भाभी की गीली चिकनी बूर में राजू का लंड उतरने लगा और पूरा का पूरा लंड उतरते ही भाभी और राजू के मुंह से एक साथ आह्ह … निकल गई। लंड पूरा का पूरा बूर में उतर गया था और भाभी अब राजू के लंड पर उछलने की तैयारी कर रही थी।

भाभी ने राजू के गले में बांहें डाल दीं और राजू के लंड पर उछलना शुरू हो गई। राजू ने भाभी के चूचों को मुंह में भर लिया। “उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मेरी जान … मेरी रानी … तुम्हारी गर्म बूर में लंड देकर तो मैं दुनिया ही भूल जाता हूं।

” भाभी बोली- स्सस् … मेरे राजा … तुम्हारा लंड मेरी बूर की प्यास और बढ़ा देता है। मैं इसको खा जाऊंगी … आह्ह् … चोदो मुझे मेरे राजा … आह्हह …दोनों ही मस्ती में चुदाई का मजा लेने लगे। उछलने के कारण भाभी की चूड़ियां खन-खन कर रही थीं।

भाभी की बूर पच-पच कर रही थी और दोनों की जुबान आह् … आह … कर रही थी। अपने मजे में वो ये भी भूल गये कि घर में कोई और मर्द भी सो रहा है। वो दोनों चुदाई में खोये हुए थे।

राजू बीच-बीच में अंगुली से भाभी की गांड का छेद भी सहला रहा था। लेकिन इसी बीच भाभी का पति रमेश नींद से उठ गया। भाभी की चूड़ियों की खन-खन सुन कर उसको शक हो गया ये आवाज कहां से आ रही है।

साथ में ही सुनीता भाभी के मुंह से जो सीत्कार निकल रहे थे उनकी आवाज भी रमेश ने झट से पहचान ली। वो तुरंत उठ कर रसोई में गया और लैम्प जला कर दूसरे बेड रूम की ओर जाने लगा। जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो देखा कि उसकी बीवी किसी और के लौड़े की सवारी कर रही है।

जैसे ही लैम्प की रोशनी कमरे में पहुंची तो सुनीता भाभी और राजू की गांड फट गई। दोनों को ही उसके पति ने चुदाई करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। वो हक्का-बक्का होकर रमेश को देखते ही रह गये।

उनको अंदाजा नहीं था कि रमेश नींद से जाग भी सकता है। मगर रमेश ने नंगी भाभी को गैर मर्द के लौड़े के ऊपर देख लिया था। रमेश बोला- साली तू यहां पर किसी और के लंड से ठुकवा रही है।

साली रांड। मेरी मां ने सही कहा था तेरे बारे में। वो मुझे बोल कर गई थी कि अपनी बीवी का ध्यान रखना।

उस वक्त मैं मां की बात को हल्के में ले गया। लेकिन तू साली चुदक्कड़ यहां दूसरे के लंड के साथ रंगरेलियां मना रही है। भले ही रमेश ने उन दोनों को देख लिया था लेकिन अभी भी राजू का लंड सुनीता भाभी की बूर में ही था और उसने अपनी मलाई सुनीता भाभी की बूर में गिरा दी थी।

लेकिन बस रमेश के आने के कारण धक्के बंद हो गये थे। सुनीता भाभी को भी अहसास हो गया था कि राजू का माल बूर में निकल चुका है इसलिए उसको एक अलग ही नशा सा चढ़ा हुआ था। रमेश की बातों का उस पर कोई खास असर नहीं हो रहा था।

इधर रमेश वंदना को गालियां दे रहा था। साली, तेरी इतनी हिम्मत हो गई कि तू गैर मर्द को मेरे ही घर में बिस्तर पर ले आई। सुनीता भाभी बोली- तो क्या करती मैं?

तुम्हारे लंड से मेरी बूर की प्यास नहीं बुझती है। तुम तो दो धक्के लगा कर एक तरफ हो जाते हो। रमेश- तो साली, सांड का लंड क्यूं नहीं ले लेती।

भाभी बोली- मैं तो राजू का ही लूंगी। तुमको जो करना है कर लो। सुनीता भाभी ने राजू की तरफ देख कर कहा- तुम रुक क्यों गये।

इस नामर्द से डरने की जरूरत नहीं है। तुम चुदाई चालू रखो। राजू बोला- लेकिन मेरे लंड का माल बूर में निकल चुका है।

भाभी ने राजू के मुंह पर एक तमाचा मारा और उठ कर झल्लाती हुई नंगी ही कमरे से बाहर निकल गई। राजू भी उठ कर अपने कपड़े लेकर दरवाजे की तरफ भागा तो रमेश ने लैम्प राजू की गांड पर फेंक कर मारा। राजू की गांड पर गर्म लैम्प लगा लेकिन वो गांड को मलते हुए घर से बाहर भाग गया।

उसके बाद रमेश सुनीता के कमरे की तरफ गया लेकिन सुनीता भाभी ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था। रमेश अपना सिर पीटते हुए दूसरे कमरे में जाकर लेट गया। रमेश दरवाजे के बाहर खड़ा रह-रहकर गालियां दे रहा था।

“साली रांड! दरवाजा खोल! आज तेरी गांड और बूर दोनों फाड़ूंगा!

”सुनीता अंदर से चिल्लाई – “खोलूंगी नहीं नामर्द! तेरे दो धक्के वाले लंड से मेरी बूर की प्यास नहीं बुझती। राजू का मोटा लंड चाहिए मुझे!

”तभी बाहर से राजू की आवाज आई। वो भागकर पूरा नहीं गया था। गांड पर लैम्प का निशान लेकर वो वापस आ गया था।

“रमेश भैया, माफ करना… भाभी ने खुद बुलाया था। ”रमेश ने दरवाजा जोर से ठोका। सुनीता ने आखिरकार खोला।

तीनों नंगे-नंगे कमरे में खड़े थे। सुनीता की बूर से अभी भी राजू का गर्म माल रिस रहा था। रमेश ने सुनीता के बाल पकड़कर खींचा और उसके मुंह में अपना लंड ठूस दिया।

“चूस साली! आज दोनों के लंड चूसेगी! ”सुनीता ने बिना विरोध के रमेश का लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।

राजू पीछे से आया और सुनीता की गांड के छेद पर अपना लंड रगड़ने लगा। रमेश बोला – “राजू, आज दोनों मिलकर इस रांड को चोदो। इसकी बूर और गांड दोनों फाड़ दो!

”राजू ने सुनीता को चारों हाथ-पैर करवाया। रमेश ने आगे से अपना लंड सुनीता के मुंह में ठूसा रखा था। राजू ने पीछे से पहले उसकी बूर में लंड पेल दिया।

बूर अभी भी गीली और माल से भरी हुई थी। “आह्ह्ह… दोनों लंड… मारो मुझे! ” सुनीता गले में लंड लिए बड़बड़ा रही थी।

राजू 10 मिनट तक बूर चोदता रहा फिर लंड निकालकर सीधे गांड के छेद पर लगा दिया। “अब गांड मारूंगा चुदक्कड़! ”सुनीता चीखी – “उई माँ… गांड फट गई… धीरे… नहीं… जोर से मारो!

”राजू ने एक जोर का धक्का मारा और आधा लंड गांड में घुस गया। सुनीता की आंखों से आंसू निकल आए लेकिन वो पीछे हट नहीं रही थी। रमेश ने उसके बाल और कसकर पकड़े और गले तक लंड ठूस दिया।

दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे – एक मुंह में, एक गांड में। सुनीता की बूर खुली पड़ी थी और उससे राजू का पुराना माल बह रहा था। थोड़ी देर बाद रमेश ने लंड मुंह से निकाला और सुनीता को पलटा।

अब सुनीता रमेश के ऊपर सवार हो गई। रमेश का लंड उसकी बूर में समा गया। राजू ने फिर से पीछे से गांड में लंड पेल दिया।

अब दोनों लंड एक साथ सुनीता के अंदर थे – बूर और गांड में। सुनीता पागलों की तरह चिल्ला रही थी – “दोनों छेद फट रहे हैं… चोदो रांड को… और जोर से… मेरी बूर और गांड दोनों इस्तेमाल करो! ”रमेश नीचे से धक्के मार रहा था, राजू पीछे से गांड चोद रहा था।

सुनीता की चूड़ियां खन-खन कर रही थीं, बूर और गांड पच-पच की आवाज कर रहे थे। कमरे में सिर्फ सिसकारियां और मांस की आवाजें गूंज रही थीं। आधे घंटे बाद राजू ने गांड के अंदर ही झड़ दिया।

गर्म माल गांड के छेद से बाहर बहने लगा। फिर रमेश ने सुनीता को नीचे लिटाया और उसकी बूर में जोर-जोर से धक्के मारकर अपना माल छोड़ दिया। लेकिन सुनीता अभी भी तृप्त नहीं हुई थी।

वो दोनों के लंड को बारी-बारी से मुंह में लेकर फिर से खड़ा करने लगी। “और चाहिए… दोनों का लंड फिर से डालो… आज रात भर चोदो मुझे! ”रमेश और राजू दोनों ने फिर से लंड खड़े किए।

इस बार सुनीता को दीवार से लगाकर खड़ा किया। रमेश ने आगे से बूर में लंड डाल दिया, राजू ने पीछे से गांड में। दोनों एक साथ धक्के मारने लगे।

सुनीता की टांगें कांप रही थीं, मम्मे हिल रहे थे, बूर और गांड दोनों पूरी तरह फूले और लाल हो चुके थे। रात भर तीनों ने सुनीता की बूर और गांड का इस्तेमाल किया। कभी दोनों एक साथ, कभी बारी-बारी से, कभी सुनीता दोनों के लंड एक साथ मुंह में लेती।

सुनीता खुद मांग रही थी – “रांड बना दो मुझे… दोनों का माल बूर और गांड में भर दो! ”सुबह 5 बजे तक सुनीता बिस्तर पर पड़ी थी। उसकी बूर और गांड दोनों खुली, सूजी हुई और वीर्य से लbalब थीं।

रमेश और राजू दोनों थककर उसके दोनों तरफ लेटे हुए थे। सुनीता ने दोनों के लंड को सहलाते हुए कहा – “अब से जब भी मन करे, दोनों आ जाना। मेरी बूर और गांड दोनों के लिए हमेशा तैयार रहेंगी।

”रमेश मुस्कुराया – “साली, आज से तू सिर्फ मेरी नहीं, दोनों की रांड है। ”राजू ने उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए कहा – “कल फिर आऊंगा… आज से डेली चुदाई तय! ”

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