बहन की चुत की आग दोस्त से करवाई शांत – Hindi Sex Story

दोस्तो, मैं विकास … मेरे पिता जी एक बहुत बड़े बिज़नसमैन है। उनका करोड़ों का बिज़नस है। जिस सिलसिले में वो विदेशों में अक्सर ही रहते हैं।

मॉम भी उनकी ही पार्टनर हैं। वे दोनों अक्सर अपने बिजनेस के सिलसिले में घर से बाहर ही रहते थे। मैं एमबीए कर रहा हूँ।

मेरी कद काठी बहुत ही मस्त है, जिस कारण बहुत सी लड़कियां मुझ पर मरती भी हैं। मेरी बहन की सहेलियां भी मुझपे मरती हैं। अब पहले मैं अपनी बड़ी बहन के बारे में बता देता हूँ।

मेरी बहन का नाम अंजलि शर्मा है। उसका कद 5 फुट 7 इंच है, उसे तने हुए मम्मे 38 इंच के हैं। उठी हुई गांड का नाप 38 इंच है।

उसका पेट बिल्कुल भी निकला हुआ नहीं है। वो एक तरह से सेक्स बम्ब है, जो भी उसे देखता है, उसका लंड खड़ा हो जाता था। मेरा दावा कि अगर कोई बूढ़ा भी उसको देख ले, तो मेरा दावा है कि उस बुड्डे का लंड भी खड़ा हो जाएगा।

हालांकि मैंने कभी भी अपनी बहन को सेक्स की नज़र से नहीं देखा था। हमारे घर पर कोई भी रोक टोक नहीं है। कोई भी कैसे भी कपड़े पहन सकता है।

(घर दिल्ली-एनसीआर के नॉर्थ इंडियन इलाके में है। )एक बार अंजलि मेरे साथ शॉपिंग कर रही थी, तो वो ब्रा पेंटी वाले सेक्शन में चली गई। मुझे देर हो रही थी, तो मैं उसे बुलाने चला गया।

मैंने देखा कि वो बहुत ही हॉट ब्रा पेंटी खरीद रही थी। मैं ये देख कर शॉक्ड हो गया। अंजलि ने मुझे देखकर वो छुपाई नहीं बल्कि शॉप वाले लड़के को और हॉट पेंटी ब्रा दिखाने को बोलना शुरू कर दिया।

उसने सेल्समैन से कहने के बाद मेरी तरफ देखकर स्माईल दी। मैं कुछ नहीं बोला, बस चुप रह गया। उसने बड़ी तसल्ली से अपने लिए ब्रा पेंटी खरीदी और पैक करवाके मेरे साथ वापस आ गई।

जब मैं घर आ गया और खाना खाकर सोने लगा, तो मुझे नींद नहीं आ रही थी। अचानक मुझे अंजलि की याद आ गई कि वो कैसे ब्रा पेंटी बड़े आराम से मेरे सामने ही हाथ में लेकर बैठी थी। मैं अचानक उसके मम्मों और चूतड़ों के बारे में सोचने लगा कि इतने मस्त चूचे और चूतड़ हैं, पता नहीं साली कितनों से चुदी होगी।

बस उसकी नंगी जवानी को याद करके मैं मुठ मार कर सो गया। सुबह जब ब्रेकफास्ट के टेबल पर आया, तो अंजलि शॉर्ट्स में ही थी, जो काफी पतले कपड़े के थे। उसमें से उसकी रेड कलर की पेंटी और ग्रीन ब्रा नज़र आ रही थी।

मैंने उससे बात की- अंजलि दी, आज कॉलेज नहीं जाना क्या? अंजलि- नहीं भाई … मेरी तबियत ठीक नहीं है, रात को मैं बाथरूम में गिर गई थी, मेरी कमर में दर्द हो रहा है। मैं- अरे कैसे हो गया दीदी … और आप अब बता रही हो, पहले क्यों नहीं बताया … तुम बता सकती थी न … मुझे रात को ही जगा लेना था।

अंजलि- अरे बाबू … मेरी डार्लिंग, कोई बात नहीं … मैंने पेन किलर गोली ले ली थी … अब बस कमर में जरा सा दर्द है। अगर तुम मेरी मालिश कर दो, तो मेहरबानी होगी। मैं- अरे दीदी मेहरबानी की क्या बात है … आओ … अभी कर देता हूँ।

हम दोनों रूम में आ गए। वो मेरे बेड पर उल्टा लेट गई। मैं तो उसके चूतड़ों को देख कर उसी घाटी में खो गया।

तभी दीदी ने आवाज लगायी- अब शुरू भी हो जाओ यार! मैंने दीदी के शॉर्ट्स को उतारा, तो उसकी रेड पेंटी गांड के अन्दर घुसी जा रही थी। ये देख कर मेरा लंड खड़ा ही हो गया।

मैंने जैसे ही उसकी कमर पर हाथ लगाया, मैं तो जैसे स्वर्ग में ही चला गया था। मैंने अच्छे से दीदी की गांड की मालिश शुरू की। दीदी भी थोड़ा ‘आह आह्ह आह्ह्ह …’ कर रही थी।

दीदी बोली- तुम्हारे हाथों में जादू है, मेरा दर्द कम हो रहा है … दो तीन दिन की मालिश कर देना, मैं ठीक हो जाऊंगी। मैं रोज दीदी की गांड की मालिश करने लगा। तीन दिन में दीदी ठीक हो गई।

लेकिन अब मेरे मन में हमेशा दीदी की गांड ही रहती कि क्या मैं कभी दीदी के साथ सेक्स कर पाऊंगा या नहीं। फिर मैं सोचता कि वो मेरी बहन है। मुझे कुछ तो समाजिक बंधन डरा रहे थे, कुछ अन्दर से भी डर सा लग रहा था।

एक दिन मैं कॉलेज में दोस्तों के साथ मस्ती कर रहा था, तो मेरा दोस्त अमन ठाकुर, मुझसे बात करने लगा। अमन मेरा कॉलेज का दोस्त था। वो काफी बार कई रंडियां चोद चुका था।

उसके पिता जी मेरे पिता जी से भी 20 गुना अमीर थे। उसके घर से पैसों की कोई कमी नहीं थी। अमन मुझसे बोला कि आज मैं एक नयी रंडी चोदने जा रहा हूँ, साली सील बंद माल है … उसकी चूत का उद्घाटन मैं ही करूंगा।

दो लाख में उसकी नथ उतारने का सौदा हुआ है। उसकी चूत को मैं रात भर चोदूंगा, तू भी चल, तू भी अपना लंड उसके मुँह में डाल लेना। मैंने मना कर दिया … क्योंकि मेरे मन में अंजलि ही थी।

मैं घर आ गया। मैं घर आ कर अंजलि के नाम की मुठ मार कर सोने लगा। पर नींद नहीं आ रही थी, तो मैं अन्तर्वासना सेक्स स्टोरी पढ़ने लगा।

इसमें रिश्तों में चुदाई की कुछ हिंदी सेक्स स्टोरी का लिंक पर क्लिक किया, तो सामने भाई बहन, बाप बेटी की सेक्स स्टोरी आ गईं। मैंने दो सेक्स स्टोरी पढ़ीं, तो मजा आ गया। फिर मैंने ऑनलाइन सेक्स चैट करनी शुरू की, जिसमें एक लड़की से मेरी चैट शुरू हुई।

हम दोनों बहुत ही खुल कर चैट करने लगे थे। वो मेरे ही शहर की थी। करीब एक हफ्ते तक उस लड़की से सेक्स चैट के बाद मैंने उससे मिलने को बोला कि हम सेक्स करेंगे।

लेकिन उसने मना कर दिया। मेरी बहुत मिन्नतें करने पर उसने मिलने की हामी भरी। मैंने पूछा कि हम एक दूसरे को पहचानेंगे कैसे?

उसने बोला कि मैं ब्लैक टी-शर्ट पहन कर आऊंगी। तुम भी ब्लैक टी-शर्ट में ही आना। मैंने ओके कह दिया।

हमने मिलने की जगह एक रोज़ गार्डन का वो हिस्सा रखा था, जिसमें कोई नहीं जाता था। मैं सुबह गार्डन में जाकर बैठ गया। मैं फोन पर उससे चैट कर रहा था, अचानक पीछे से किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा- आ गए जनाब।

मैं जैसे ही पीछे मुड़कर देखने लगा, मेरे तो तोते ही उड़ गए। क्योंकि वो मेरी ही सगी बहन अंजलि थी। अंजलि भी मुझे देख कर हैरान हो गई।

दो तीन मिनट तक तो हमने आपस में कोई बात ही नहीं की। फिर मैंने बात शुरू की- दीदी, आप ऐसी साइट पर सेक्स स्टोरी पढ़ती हो … क्या आपको शर्म नहीं आती … आप रात भर सेक्स चैट करती हो। अंजलि- तो तुम भी तो रात भर सेक्स चैट करते हो … कैसे रात को मेरी चूत चाटने की बात कर रहे थे।

तुम बोल रहे थे कि अपना 8 इंच का लंड मेरी चूत में डालोगे, रात भर चोदोगे, गांड भी मारोगे। यह सब कुदरत की देन है। इसमें ना आपकी गलती है, ना मेरी।

भाई ये प्राकृतिक क्रिया है। मेरा भी चुदने का मन करता है, जब मैं पोर्न मूवी देखती हूँ। आज तो मेरा मन और भी ज्यादा कर रहा है।

लेकिन इधर तो तुम निकले। मैंने उसको खुल कर चूत लंड चुदाई बोलते देखा तो मैंने कहा- तो क्यों ना हम आपस में ही सेक्स करें? लेकिन अंजलि ने साफ मना कर दिया और बोली- भाई बहन में ये सब नहीं हो सकता।

हां, हम लोग खुल कर बात कर सकते हैं। मैंने पूछा- तुम अभी तक कितने लड़कों से चुदी हो? अंजलि ने बताया- मैं अभी तक वर्जिन हूँ।

मैंने आज तक कभी सेक्स नहीं किया है, लेकिन मेरा मन बहुत करता है। पर मैं भाई के साथ नहीं कर सकती। तभी मेरे मन में एक ख्याल आया कि क्यों ना मैं अंजलि को अमन से चुदवा लूं और उससे वर्जिन चूत के बदले पैसे भी वसूल करूं।

वैसे भी पापा ने स्पोर्ट्स बाइक लेकर देने को मना कर दिया और बोला था कि खुद कमाओ और चाहे जहाज खरीद लो। उधर से हम दोनों घर वापस आ गए। मैंने दीदी के रूम में जाकर दीदी को बड़े प्यार से कहा- दीदी मेरे पास एक रास्ता है … जिसमें आपकी चूत को चुदाई का मजा भी आएगा और हम पैसे भी कमा सकते हैं।

अंजलि बोली- कैसे? मैंने अमन के बारे में बताया तो दीदी ने पूछा- कोई रिस्क तो नहीं होगा? अब मैंने दीदी को बस किसी तरह अमन से चुदने के लिए मना ही लिया।

अगले दिन कॉलेज जाकर मैं अमन के सामने जानबूझ कर दीदी की पिक देख रहा था। अमन ने अंजलि की पिक देखते ही कहा- वाह क्या माल है यार … ऐसी पटाखा लड़की तो मैंने आज तक नहीं देखी … कौन है यह छमिया? मैंने बोला- एक टॉप की मॉडल है।

अमन बोला- इसकी दिलवा दे, मैं तुझे भी खुश कर दूँगा। मैंने कहा- यह पांच लाख रुपए लेगी क्योंकि यह वर्जिन है। वो बोला- कोई नहीं यार … बस तू तो इसकी कुवारी चूत दिलवा दे।

मैंने हामी भर दी। फिर घर वापिस आ कर मैंने दीदी को बताया। दीदी बोली- मैं होटल में नहीं जाऊंगी, वहां सबको पता चल जाएगा कि मैं कॉलगर्ल हूँ, उसे तुम घर पर ही बुला लो।

मैंने कहा- ठीक है लेकिन उसे पता ना चले कि हम दोनों भाई बहन हैं। अंजलि बोली- तुम टेंशन ना लो … वो मैं सब हैंडल कर लूंगी। मैंने अमन से पैसे लिए और उसे लेकर अपने घर ले आया।

अमन ने पूछा कि किधर ले जा रहा है। मैंने कहा- तू बस चल … उसको मैंने अपने घर में बुला लिया है। हम दोनों घर आ गए।

मैंने दीदी को मिस कॉल दी, तो दीदी ऊपर वाले कमरे से नीचे आ गई। इस वक्त उसने एक बहुत ही सेक्सी ड्रेस पहनी हुई थी। क्या बताऊं, उसे देखकर तो मेरा लंड भी खड़ा हो गया था।

अमन ने अंजलि को हग किया और उसके होंठों पर चुम्बन कर दिया। दीदी ने स्माईल दी और मुझे आंख मारी। वो अमन से बोली- आप कमरे में अन्दर चलिए, मैं अभी आती हूँ।

अमन कमरे में चला गया। अंजलि ने मेरे कान में कहा- आज तुम्हारी 22 साल की बहन की चुदाई होने वाली है, चूत की सील टूटने वाली है, मेरी चुदाई देखना और मजे लेना। यह कह कर अंजलि कमरे के अन्दर चली गई।

अमन ने दीदी के कमरे में आते ही उसे पीछे से झटके से पकड़ लिया और होंठों को जबरदस्त चूसने लगा। वो दीदी के मम्मों को दबाने लगा। कभी वो दीदी के चूतड़ों को दबाता और चुम्मियां लेता।

उसकी हरकतों से मेरा तो लंड पूरे ताव में आ गया था। उसने अंजलि की टी-शर्ट और जींस उतार दी। साथ ही उसने अंजलि दीदी की बहुत सेक्सी दिखने वाली पेंटी भी फाड़ दी।

दीदी की बिना बाल वाली चिकनी बूर उसके सामने आ गई थी। वो दीदी की बूर चूसने लगा। वो एकदम से पगला गया था।

कभी वो दीदी की बूर में जीभ डालता, कभी चूत के दाने को चाटने लगता। मैंने देखा कि कुछ ही देर में अंजलि दीदी की बूर एकदम लाल हो गई थी। फिर अमन ने अपना लंड अंजलि के हाथ में पकड़ा दिया और बोला कि इसे चूस कर खड़ा कर दे।

अंजलि ने लंड चूसने से मना किया, तो उसने अंजलि के मुँह पर चांटा जड़ दिया। मुझे बहुत गुस्सा आया, लेकिन अब पैसे लिए थे, तो क्या कर सकते थे, अंजलि को अमन का लंड चूसना पड़ा। लेकिन दो मिनट बाद ही मुझे लगा कि अंजलि खुद ही बड़े मजे अमन का लंड चूस रही थी।

वो गले तक लंड लेने लगी थी। लंड की नस चूसते हुए थूक लगा-लगाकर चूस रही थी। अमन को भी लंड चुसाई में मजा आ रहा था, वो अंजलि के बाल पकड़ कर मुख मैथुन में लगा हुआ था।

वो लंड को अंजलि के गले में पेल रहा था। कुछ देर बाद अमन ने अंजलि की बूर के होंठों पर अपना दस इंच का लंड रखा और धक्का दे मारा। उसका दो इंच लंड अंजलि की बूर में घुसता चला गया, जिससे अंजलि बहुत ऊंचे स्वर में चिल्ला उठी- उई मां मर गई … मुझे बचाओ उम्म्ह … अहह … हय … ओह … उसकी आंखों में आंसू आ गए थे।

बूर से खून की एक बूंद भी निकली। तभी अमन ने दूसरा झटका दे मारा, तो उसका आधा लंड बूर में चला गया। बूर फटती हुई सी लग रही थी।

लंड के झटकों के कारण अंजलि दीदी बेहोश हो गई। अमन भी एकदम से डर गया और उसने लंड डाले हुए रुकना ठीक समझा। उधर ही पास की टेबल पर पानी का गिलास रखा था।

अमन अंजलि के चेहरे पर पानी के छींटे मारने लगा। कुछ देर बाद अंजलि को होश आया, तो अमन फिर से शुरू हो गया। कुछ देर बाद अंजलि को दर्द होना बंद हो गया।

अमन अंजलि दीदी को आधा घंटे तक बूर चोदता रहा। अब अंजलि को मजा आने लगा था। वो एक बार झड़ गई थी, तो उसकी बूर में चिकनाई आ गई थी।

इससे अमन का लंड बड़ी तेजी से अंजलि दीदी की बूर में अन्दर बाहर हो रहा था। लंड पूरी तरह बूर में समा जाता और फिर बाहर निकलता। कुछ देर बाद अंजलि दीदी अमन के ऊपर आ गई।

इससे साफ़ पता चल रहा था कि अब उसे भी खूब मजा आने लगा था। वो अमन के लंड पर बूर टिका कर बैठ गई। अमन ने नीचे से कमर उठा कर अंजलि की बूर में पूरा लौड़ा पेल दिया।

कुछ देर बाद अंजलि अमन के लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी। मुझे पीछे से अंजलि दीदी की उछलती गांड बहुत ही मस्त लग रही थी। गांड हिल-हिलकर लंड निगल रही थी।

एक बार अमन ने अंगुली से उसकी गांड का छेद भी सहलाया। कोई एक घंटे तक दीदी की बूर को दो बार चोदने के बाद अमन अपने कपड़े पहन कर चला गया। लेकिन वो अंजलि की बूर का बैंड बजा गया था।

मेरी बहन की चुदाई जोरदार हो चुकी थी। बूर पूरी तरह फूली हुई और लाल थी। अंजलि से उठा भी नहीं जा रहा था।

मैंने जाकर उसको उठाया और बाथरूम में ले गया। बाथरूम में ले जाकर मैंने उसकी बूर की सफाई की और तेल लगाया। फिर कमरे में ला कर मैंने दीदी को पेनकिलर गोली दी, ताकि ज्यादा दर्द ना हो।

अंजलि ने मुझे हग किया और कहा- थैंक्स भाई … मुझे लड़की से औरत बनाने के लिए। मैंने कहा- इट्स ओके। वो कहने लगी- मुझे अमन से चुदने में बड़ा मजा आया।

आज की पूरी कमाई तेरी हो गई। तू सारे पैसे रख ले। मैंने फिर एक बार उसकी आंखों में देखा, तो वो मेरी बात समझ गई।

उसने कहा- अभी भी मुझे अपने भाई से चुदने में गलत नजर आ रहा है। मैंने कहा- इन्तजार सब गलत को सही कर देता है। मुझे इन्तजार रहेगा।

दीदी ने मुझे गले से लगा लिया। फिर मैंने कहा- दूसरा लंड लेना हो तो बात करूं? अंजलि हंस दी और बोली- एक दो दिन बाद बताती हूँ।

अगले दो दिन अंजलि कमरे में पड़ी रही। उसकी बूर अभी भी सूजी हुई थी। मैं रोज उसकी बूर पर तेल लगाता, साफ करता।

तीसरे दिन शाम को अंजलि खुद मेरे रूम में आई। अंजलि ने दरवाजा बंद किया और सीधे मेरे लंड पर हाथ रख दिया। “भाई, अमन का लंड अच्छा था… लेकिन अब मुझे और चाहिए।

आज रात तू अमन को फिर बुला। इस बार मैं दोनों से चुदूंगी। मेरी बूर और गांड दोनों फाड़ दो।

”मेरा लंड तुरंत तन गया। मैंने अमन को फोन किया। “यार, वही माल फिर तैयार है।

आज रात दोनों लंड चाहिए उसे। घर आ जा। ”रात 9 बजे अमन आ गया।

अंजलि ने आज और भी सेक्सी ड्रेस पहनी थी – सिर्फ एक छोटी नाइटी, नीचे कुछ नहीं। उसके बड़े-बड़े मम्मे नाइटी से बाहर झांक रहे थे और गांड की दरार साफ दिख रही थी। जैसे ही अमन ने दरवाजा खोला, अंजलि ने खुद उसके होंठ चूस लिए।

फिर मेरी तरफ देखकर बोली, “भाई, तू भी कपड़े उतार। आज दोनों का लंड मेरी बूर और गांड में घुसेगा। ”मैंने कपड़े फेंक दिए।

मेरा 8 इंच का लंड पहले से तना हुआ था। अमन ने भी अपना 10 इंच का मोटा लंड निकाल लिया। अंजलि बिस्तर पर चारों हाथ-पैर करके घुटनों के बल बैठ गई।

उसकी गांड ऊपर उठी हुई थी, बूर और गांड का छेद दोनों साफ दिख रहे थे। अमन पीछे से आया और बिना किसी प्रस्ताव के अपना लंड अंजलि की बूर में धकेल दिया। “आह्ह्ह… साला पूरा अंदर चला गया!

” अंजलि चिल्लाई। अमन जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ अंजलि की गांड हिल रही थी।

मैं सामने बैठ गया। अंजलि ने मेरा लंड मुंह में ले लिया और गले तक चूसने लगी। थूक की लार लंड पर बह रही थी।

अमन 15 मिनट तक बूर चोदता रहा। फिर उसने लंड निकाला और अंजलि की गांड के छेद पर रख दिया। “अब गांड मारूंगा साले!

” अंजलि ने खुद गांड के छेद को फैलाया। “मारो… फाड़ दो मेरी गांड! ”अमन ने धीरे से लंड का सिरा गांड के छेद में घुसाया।

अंजलि चीखी – “उई माँ… फट गई… आह्ह्ह… धीरे…! ” लेकिन अमन ने एक जोर का धक्का मारा और आधा लंड गांड में समा गया। अंजलि की आंखों से आंसू निकल आए, लेकिन वो पीछे हट नहीं रही थी।

अमन पूरा लंड गांड में पेल दिया और जोर-जोर से गांड चोदने लगा। हर धक्के के साथ अंजलि की गांड की मांस हिल रही थी। मैंने अंजलि के बाल पकड़कर अपना लंड उसके गले में ठूस दिया।

वो गला भर-भरकर लंड चूस रही थी। थोड़ी देर बाद अमन ने लंड निकाला। गांड का छेद खुला और लाल हो चुका था।

अब मैं पीछे गया। मेरा लंड अंजलि की गंदी गांड में घुस गया। गांड इतनी टाइट थी कि लंड अटक रहा था।

मैंने जोर के धक्के मारे। अंजलि चिल्ला रही थी – “भाई… और जोर से… गांड फाड़ दो… उम्म्ह… अहह…! ”अमन ने अंजलि को पलट दिया।

अब अंजलि अमन के ऊपर सवार हो गई और उसकी बूर में लंड बैठा लिया। मैंने पीछे से फिर से गांड में लंड डाल दिया। अब दोनों लंड एक साथ अंजलि के अंदर थे – एक बूर में, एक गांड में।

अंजलि पागलों की तरह उछल रही थी। “दोनों लंड… दोनों छेद फट रहे हैं… चुदो मुझे… रंडी बना दो! ”हम दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे।

अंजलि की बूर और गांड से पानी और झाग निकल रहा था। आधे घंटे बाद अमन ने अंजलि की बूर में ही झड़ दिया। गर्म वीर्य बूर से बाहर बहने लगा।

मैंने गांड से लंड निकाला और अंजलि के मुंह में ठूस दिया। अंजलि ने सारा वीर्य पी लिया। फिर मैंने उसे चारों हाथ-पैर करवाया और फिर से गांड में लंड पेल दिया।

इस बार मैंने बिना रुके 20 मिनट तक गांड चोदी। आखिर में गांड के अंदर ही झड़ गया। अंजलि थककर बिस्तर पर गिर गई।

उसकी बूर और गांड दोनों पूरी तरह खुली, लाल और वीर्य से भरी हुई थीं। अमन ने फिर से अपना लंड खड़ा किया और अंजलि की बूर में दूसरी राउंड शुरू कर दी। मैंने अंजलि के मम्मों को मुंह में लिया और चूसने लगा।

अमन बूर चोद रहा था, मैं मम्मे पी रहा था। अंजलि लगातार सिसकारियां ले रही थी। रात भर हमने अंजलि को बारी-बारी से चोदा।

कभी बूर, कभी गांड, कभी दोनों एक साथ। अंजलि खुद मांग रही थी – “और चोदो… मेरी बूर और गांड दोनों को इस्तेमाल करो… रंडी की तरह! ”सुबह 4 बजे अमन चला गया।

अंजलि मेरे सीने से चिपककर लेटी हुई थी। उसकी बूर और गांड से अभी भी वीर्य रिस रहा था। उसने फुसफुसाकर कहा – “भाई, आज पहली बार सही मायने में औरत बनी।

कल फिर अमन को बुला… या और दोस्त बुला ले। मैं और लंड चाहती हूँ। ”मैंने उसकी गांड सहलाते हुए कहा – “जैसी तेरी मर्जी दीदी… अब तू पूरी रंडी बन चुकी है।

”अंजलि मुस्कुराई और मेरे लंड को फिर से मुंह में ले लिया। कैसी लगी कहानी दोस्तो? कमेंट करके बताओ आगे क्या होना चाहिए!

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